बिहार में अश्लील और जातिसूचक गानों पर लगेगी रोक: राज्य सरकार का बड़ा फैसला, गृह विभाग को सख्त कार्रवाई के निर्देश

दस्तक 7 मिडिया, बिरौल, दरभंगा।

बिहार में सार्वजनिक स्थानों, गाड़ियों और आयोजनों में बजने वाले अश्लील, द्विअर्थी और जातिसूचक गानों पर अब पूरी तरह से नकेल कसने की तैयारी कर ली गई है। कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव प्रणव कुमार (भा.प्र.से.) ने राज्य के गृह विभाग के सचिव को पत्र लिखकर इस संबंध में तुरंत और प्रभावी नियंत्रण लगाने के लिए आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
सांस्कृतिक कार्य निदेशालय द्वारा जारी इस आधिकारिक पत्र की प्रतिलिपि राज्य के सभी जिलाधिकारियों, वरीय पुलिस अधीक्षकों और पुलिस अधीक्षकों, को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी गई है। विभाग द्वारा जारी पत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि ऐसे गानों के खुलेआम बजने से समाज पर बेहद नकारात्मक असर पड़ रहा है। पत्र में निम्नलिखित गंभीर चिंताओं को रेखांकित किया गया है।
सद्भाव को ठेस–विभिन्न सार्वजनिक स्थलों, बाजारों, वाहनों, विवाह समारोहों और सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अश्लील व जातिसूचक भावनाओं को भड़काने वाले गानों के कारण आपसी भाईचारा और सौहार्द बिगड़ रहा है। इन गानों की वजह से समाज में अश्लीलता, हिंसक घटनाएं,आपसी द्वेष, वैमनस्य, कटुता और अशांति का माहौल पैदा हो रहा है।
ऐसे गानों के प्रसारण से आम लोग असहज महसूस करते हैं। विशेषकर महिलाओं और बच्चों के प्रति नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, जिससे सामाजिक एवं सांस्कृतिक वातावरण दूषित हो रहा है।
अश्लील और द्विअर्थी गाने न केवल सामाजिक मूल्यों के खिलाफ हैं, बल्कि सार्वजनिक शिष्टाचार और कानून व्यवस्था की दृष्टि से भी पूरी तरह अनुचित हैं।
सरकार का मानना है कि बिहार की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपरा और लोक भाषाओं की एक गौरवशाली पहचान रही है। इस गरिमा को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। यह एक गंभीर व ज्वलंत सामाजिक समस्या बन चुकी है, जो महिलाओं, बच्चों और पूरे समाज को बुरी तरह प्रभावित कर रही है।
कला एवं संस्कृति विभाग के इस कड़े रुख के बाद अब गृह विभाग जल्द ही पुलिस प्रशासन को जमीन पर कार्रवाई करने के निर्देश जारी कर सकता है। इसके बाद सार्वजनिक वाहनों (बस, ऑटो आदि) में अश्लील गाने बजाने पर चालान या गाड़ी जब्त होने की कार्रवाई हो सकती है।शादी-विवाह या अन्य आयोजनों में जातिसूचक या भड़काऊ गाने बजाने पर डीजे संचालकों और आयोजकों पर कानूनी शिकंजा कसा जा सकता है। बिहार सरकार का यह कदम राज्य में अश्लीलता और जातिगत तनाव को कम करने तथा एक स्वस्थ सांस्कृतिक माहौल तैयार करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।