न्यायालय परिसर में नशे की हालत में गवाही देने पहुंचा गवाह, बिहार में शराबबंदी कानून को दिया खुला चुनौती

दस्तक 7 मिडिया, बिरौल, दरभंगा।

बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून की जमीनी हकीकत को बयां करती एक बेहद चौंकाने वाली तस्वीर व्यवहार न्यायालय से सामने आई है। पिछले दिनों न्यायालय में चल रहे एक मामले में गवाही देने पहुंचा एक व्यक्ति खुद नशे की हालत में धुत था। जो प्रमाणित कर दिया कि सूबे में शराबबंदी कानून पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। इस संवेदनशील मामले का संज्ञान लेते हुए न्यायालय के निर्देश पर
पुलिस ने मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट न्यायालय में सौंप दिया है। मामले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता रामचंद्र यादव ने कहा कि सरकार का शराबबंदी कानून अब महज एक ‘कागजी पुलिंदा’ बनकर रह गया है। उन्होंने सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा अगर यह कानून बिहार में सही रूप से लागू होता, तो दूसरे राज्यों से विदेशी शराब का इतना बड़ा जखीरा तमाम सीमाओं को पार कर बिहार में प्रवेश नहीं कर पाता। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों का कहना है कि अब यह बात किसी से छुपी नहीं है कि बिहार में शराबबंदी सिर्फ नाम की है, जबकि धरातल पर यह ‘होम डिलीवरी’ के एक संगठित नेटवर्क में तब्दील हो चुकी है। तंज कसते हुए सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि इस विफल कानून के बहाने सूबे में सैकड़ों बेरोजगार युवाओं को अवैध शराब तस्करी के रूप में एक ‘नया रोजगार’ जरूर मिल गया है। जो लोग कभी साइकिल के लिए तरसते थे और जिन्हें एक अदद पक्के का मकान नसीब नहीं था, आज वे शराब की अवैध तस्करी के दम पर करोड़ों के आलीशान भवनों और लाखों की लक्जरी गाड़ियों के मालिक बन बैठे हैं।नागरिक समाज और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पूरी विफलता के पीछे सरकारी तंत्र को जिम्मेदार ठहराया है। गवाही देने न्यायालय परिसर पहुंचे हांसी गांव निवासी वैधनाथ राय के शारीरिक जांच में वह व्यक्ति शराब का सेवन कर रखा था। जिसकी पुष्टि थानाध्यक्ष चंद्र मणी ने की।