कागजों पर 90% पास, धरातल पर पूरी तरह फेल, बिरौल में ‘नल-जल योजना’ की बदहाली खोल रही विभागीय दावों की पोल

दस्तक 7 मिडिया, बिरौल, दरभंगा।

बिहार सरकार के लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग बिरौल के अधिकारियों के दावे और जमीनी हकीकत में जमीन-आसमान का फासला है। एक ओर जहां विभागीय बैठक में अभियंता यह दंभ भर रहे हैं कि विभिन्न पंचायतों में ‘नल-जल योजना’ 90 प्रतिशत सुचारू रूप से काम कर रही है, वहीं धरातल पर उतरते ही इन दावों की हवा निकल जाती है। विभागीय लापरवाही का सबसे ज्वलंत उदाहरण बिरौल प्रखंड की उछटी पंचायत का वार्ड नंबर एक है। भीषण गर्मी के इस दौर में जहां लोगों को पीने के पानी की सख्त दरकार है, वहीं नल-जल योजना का पानी लोगों के घरों तक पहुंचने के बजाय तपती सड़कों पर बहकर बर्बाद हो रहा है। योजना का असल लाभ ग्रामीणों को न मिलकर सड़कों की प्यास बुझाने में जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों में इस घोर लापरवाही को लेकर भारी आक्रोश है।

उनका कहना है कि जलजमाव और पानी की बर्बादी को लेकर महीनों से शिकायत की जा रही है, लेकिन विभाग ने पूरी तरह से आंखें मूंद रखी हैं। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि सिर्फ उछटी पंचायत ही नहीं, बल्कि प्रखंड की कई अन्य पंचायतों का भी यही हाल है, जहां इस चिलचिलाती गर्मी में भी लोग नल-जल योजना के लाभ से पूरी तरह वंचित हैं।
लोगों का सीधा आरोप है कि विभागीय अभियंताओं की इस कार्यशैली से आम जनता तो त्रस्त है ही, साथ ही सरकार को भी अकारण बदनाम करने की साजिश हो रही है। इस संबंध में प्रखंड जदयू अध्यक्ष राजेश कुमार ने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए विभाग के वरीय अधिकारी से कहा गया है। इन्होंने अभियंता से कहा है कि पानी की बर्बादी रोककर हर घर तक शुद्ध जल पहुंचाया जाए।