एक वर्ष में 42 हत्याभियुक्तों को दिलाई उम्रकैद, 421 आरोपियों की जमानत खारिज,

लोक अभियोजक अमरेंद्र नारायण झा की पहल से पुराने गंभीर मामलों के त्वरित निष्पादन में मिली सफलता

दरभंगा, विधि संवाददाता।

दरभंगा न्यायमंडल में लोक अभियोजक (पीपी) के रूप में योगदान देने के बाद से 10 जून 2026 तक के महज एक वर्ष के कार्यकाल में लोक अभियोजक अमरेंद्र नारायण झा ने सत्र न्यायालयों में लंबित गंभीर आपराधिक मामलों के त्वरित निष्पादन में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उनके नेतृत्व में अभियोजन पक्ष ने हत्या समेत कई पुराने और संवेदनशील मामलों में तेजी से सुनवाई कराकर न्यायालयों से महत्वपूर्ण फैसले दिलाए हैं।

लोक अभियोजक श्री झा ने वार्षिक लक्ष्य निर्धारित कर हत्या सहित अति पुराने गंभीर सत्रवादों को चिन्हित किया तथा अभियोजन पक्ष की ओर से गवाहों की उपस्थिति और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं को प्राथमिकता देकर न्यायिक प्रक्रिया को गति प्रदान की। इसके लिए उन्होंने अपर लोक अभियोजकों की टीम गठित कर समन्वित रूप से कार्य कराया।

अभियोजन की सक्रियता का परिणाम यह रहा कि 20 वर्ष से अधिक समय से लंबित मामलों सहित कुल 32 पुराने सत्रवादों का निष्पादन हुआ। इनमें हत्या के 13 मामलों में 42 अभियुक्तों को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। इसके अलावा 10 अन्य सत्रवादों में भी दोषियों को सजा दिलाकर पीड़ित पक्ष को न्याय उपलब्ध कराया गया।

अपराधियों में कानून का भय कायम रखने के उद्देश्य से अभियोजन पक्ष ने जमानत मामलों में भी प्रभावी पैरवी की। 10 जून 2025 से 10 जून 2026 के बीच विभिन्न सत्र अदालतों में 378 मामलों में 421 अभियुक्तों की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज कराई गईं। वहीं गंभीर अपराधों से जुड़े 392 मामलों में 673 आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं भी न्यायालयों द्वारा खारिज की गईं।

लोक अभियोजक श्री झा ने बताया कि जिले में अपराधियों के बीच कानून का भय बनाए रखने तथा पीड़ितों को त्वरित और समयबद्ध न्याय दिलाने के लिए आगे की कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। इसके तहत गंभीर एवं पुराने 50 सत्रवादों को चिन्हित किया गया है, जिन्हें स्पीडी ट्रायल के तहत शीघ्र निष्पादन के लिए न्यायालयों से अनुरोध किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि चिन्हित मामलों में गवाहों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए प्रशासनिक सहयोग प्राप्त करने की दिशा में भी पहल की गई है। अभियोजन टीम का लक्ष्य नियमित कार्यों के साथ-साथ इन 50 पुराने एवं गंभीर मामलों में शीघ्र न्यायिक निर्णय सुनिश्चित कर संविधान की न्याय-समानता की भावना को साकार करना है।