उज्ज्वला योजना में महाघोटाला, कनेक्शन पास पर 5 साल से चूल्हा-सिलेंडर गायब, जांच करने पहुंची टीम को गैस एजेंसी का असहयोग रवैया

दस्तक 7 मिडिया, बिरौल, दरभंगा।

केंद्र सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ में जमीनी स्तर पर किस कदर पलीता लगाया जा रहा है, इसका एक सनसनीखेज मामला बिरौल अनुमंडल पदाधिकारी के सामने आया है। गरीबों को धुएं से मुक्ति दिलाने के नाम पर शुरू की गई इस योजना में बड़े पैमाने पर धांधली की बू आ रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए बिरौल एसडीओ शशांक राज ने दो सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच टीम का गठन किया है।


पूरा मामला आवेदिका विष्णुपुर निवासी विभा देवी की शिकायत से जुड़ा है। शिकायत के मुताबिक, करीब पांच वर्ष पूर्व ही उनके नाम पर उज्ज्वला योजना के तहत रसोई गैस कनेक्शन स्वीकृत कर दिया गया था। लेकिन विडंबना देखिए कि पांच साल बीत जाने के बाद भी पीड़िता को न तो गैस चूल्हा मिला, न रेगुलेटर, न भरा हुआ सिलेंडर और न ही पाइप। हद तो तब हो गई जब एजेंसी द्वारा उन्हें पासबुक या एसवी पेपर तक उपलब्ध नहीं कराया गया। कागजों पर कनेक्शन चालू दिखाकर गरीबों के हक का सिलेंडर कहां जा रहा है, यह एक बड़ा सवाल है।
एसडीओ के निर्देश पर गठित जांच टीम में शामिल राजीव कुमार (प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी, बिरौल) और सुजीत कुमार (प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी, घनश्यामपुर) निष्पक्ष जांच के लिए ‘जय माता दी इण्डेन गैस एजेंसी’ बिरौल पहुंचे। जब जांच अधिकारियों ने विभा देवी के कनेक्शन से जुड़े मुख्य बिंदुओं पर रिकॉर्ड खंगालने की कोशिश की, तो एजेंसी प्रबंधन का रवैया बेहद असहयोगात्मक और संदेहास्पद रहा। एजेंसी के प्रबंधक ने जांच में सहयोग करने के बजाय, पीड़िता के कनेक्शन से संबंधित किसी भी प्रकार की संचिका (फाइल) या दस्तावेज अधिकारियों के सामने प्रस्तुत करना मुनासिब नहीं समझा। प्रबंधक का यह अड़ियल रवैया साफ इशारा करता है कि पर्दे के पीछे कुछ बड़ा छुपाने की कोशिश की जा रही है। गैस एजेंसी के इस असहयोग के बाद मामले की जांच कर रहे दोनों प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारियों ने मीडिया को फिलहाल विस्तृत जानकारी देने से इनकार कर दिया। उन्होंने केवल इतना कहा”यह एक अत्यंत गंभीर, प्रशासनिक और गोपनीय मामला है। जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आए हैं, उन्हें समेकित कर विस्तृत प्रतिवेदन सीधे अनुमंडल पदाधिकारी के समक्ष समर्पित किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि इस मामले की गहराई से जांच हुई, तो क्षेत्र में ऐसे सैकड़ों गरीब मिल सकते हैं जिनके हक का सिलेंडर कालाबाजारी की भेंट चढ़ रहा है।