खरीफ महाअभियान 2026 का भव्य आगाज, ‘खेत बचाओ अभियान’ बना केंद्रबिंदु, मिट्टी की सेहत बचाने, जैविक खेती और आधुनिक तकनीक अपनाने पर जोर, किसानों को दी गई नई कृषि योजनाओं की जानकारी
खरीफ महाअभियान 2026 का भव्य आगाज, ‘खेत बचाओ अभियान’ बना केंद्रबिंदु, मिट्टी की सेहत बचाने, जैविक खेती और आधुनिक तकनीक अपनाने पर जोर, किसानों को दी गई नई कृषि योजनाओं की जानकारी
खरीफ महाअभियान 2026 का भव्य आगाज, ‘खेत बचाओ अभियान’ बना केंद्रबिंदु,
मिट्टी की सेहत बचाने, जैविक खेती और आधुनिक तकनीक अपनाने पर जोर, किसानों को दी गई नई कृषि योजनाओं की जानकारी
दस्तक 7मीडिया /दरभंगा
कृषि विभाग, दरभंगा के तत्वावधान में बुधवार को जिला मुख्यालय में शारदीय (खरीफ) महाअभियान 2026 सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन जिला पदाधिकारी कौशल कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर कृषि वैज्ञानिकों, विभागीय अधिकारियों और प्रगतिशील किसानों की मौजूदगी में खरीफ मौसम की खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और तकनीक आधारित बनाने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, जैविक खेती (ऑर्गेनिक फार्मिंग), जल संरक्षण आधारित खेती और कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं से जोड़ना था, ताकि कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ खेती की लागत कम की जा सके और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिले।
‘खेत बचाओ अभियान’ पर विशेष फोकस
कार्यक्रम के दौरान ‘खेत बचाओ अभियान’ को लेकर व्यापक चर्चा हुई। कृषि विशेषज्ञों ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति लगातार घट रही है, जिससे उत्पादन क्षमता प्रभावित हो रही है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (इंटीग्रेटेड न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट-आईएनएम) और जैविक खेती को अपनाएं।
विशेषज्ञों ने बताया कि संतुलित उर्वरक उपयोग, जैविक खाद और हरित खाद के प्रयोग से मिट्टी की गुणवत्ता को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा बल्कि खेती की लागत भी कम होगी।
डीएसआर और बीज उपचार तकनीक अपनाने की सलाह
कार्यक्रम में किसानों को धान की सीधी बुआई (डायरेक्ट सीडेड राइस-डीएसआर) तकनीक के लाभों की जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने बताया कि डीएसआर तकनीक से पानी की बचत होती है, श्रम लागत कम होती है और समय की भी बचत होती है। इसके अलावा बीज उपचार (सीड ट्रीटमेंट) की वैज्ञानिक विधियों की जानकारी देकर रोग एवं कीट प्रबंधन के उपाय बताए गए।
क्षेत्रीय अनुसंधान स्टेशन (आरआरएस) के वैज्ञानिकों ने बीज उपचार का लाइव डेमो प्रस्तुत किया और किसानों को इसके व्यावहारिक लाभों से अवगत कराया।
किसान रजिस्ट्री और डिजिटलाइजेशन की उपयोगिता बताई
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जिला पदाधिकारी कौशल कुमार ने अपने संबोधन में किसान रजिस्ट्री (फार्मर रजिस्ट्री) और कृषि क्षेत्र में डिजिटलाइजेशन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सरकार की अधिकांश योजनाओं का लाभ अब डिजिटल माध्यम से किसानों तक पहुंचाया जा रहा है। ऐसे में प्रत्येक किसान का पंजीकरण आवश्यक है, ताकि उन्हें समय पर बीज, अनुदान, प्रशिक्षण और अन्य सुविधाओं का लाभ मिल सके।
उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसान रजिस्ट्री अभियान को तेजी से आगे बढ़ाया जाए और अधिक से अधिक किसानों को इससे जोड़ा जाए।
कृषि योजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत
जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. सिद्धार्थ ने कार्यक्रम में आए सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए जिले में खरीफ मौसम के लिए संचालित योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने किसानों को बीज वितरण, अनुदान, प्रशिक्षण कार्यक्रम और अन्य योजनाओं की रूपरेखा से अवगत कराया।
संयुक्त निदेशक (उद्यान) और संयुक्त निदेशक (सस्य) ने क्रमशः ‘खेत बचाओ अभियान’ तथा कृषि सेवाओं और आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) को मजबूत बनाने के उपायों पर तकनीकी मार्गदर्शन दिया।
उपनिदेशक कृषि अभियांत्रिकी ने नए मिलेट प्लांट और आधुनिक कृषि यंत्रों की उपयोगिता बताते हुए किसानों को यंत्रीकरण से जुड़ने की सलाह दी। वहीं सहायक निदेशक ने एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम) की आवश्यकता और उसके लाभों पर विस्तार से चर्चा की।
आत्मा योजना और बीज योजनाओं की समीक्षा
कार्यक्रम के अंतिम सत्र में आत्मा (एटीएमए) योजना सहित कृषि विभाग की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने किसान रजिस्ट्री की वर्तमान स्थिति, बीज योजनाओं के क्रियान्वयन और आगामी लक्ष्यों पर चर्चा की।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि खरीफ महाअभियान के संदेश को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए प्रखंड स्तर पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकें।
बड़ी संख्या में अधिकारी और वैज्ञानिक रहे उपस्थित
कार्यक्रम में जिला स्तर के अधिकारियों के अलावा सभी प्रखंड कृषि पदाधिकारी, कृषि समन्वयक, कृषि सलाहकार, कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) जाले के वैज्ञानिक, क्षेत्रीय अनुसंधान स्टेशन के विशेषज्ञ और कृषि विभाग के कर्मचारी उपस्थित रहे।
समापन अवसर पर परियोजना निदेशक, आत्मा, दरभंगा ने सभी अतिथियों, वैज्ञानिकों एवं विभागीय अधिकारियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए किसानों के हित में विभाग की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने का संकल्प दोहराया।
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