बिरौल में ऑटो से अवैध वसूली मामला,पीड़ित के यू-टर्न लेते ही आरोपियों को मिली जमानत
बिरौल में ऑटो से अवैध वसूली मामला,पीड़ित के यू-टर्न लेते ही आरोपियों को मिली जमानत
बिरौल में ऑटो से अवैध वसूली मामला,पीड़ित के यू-टर्न लेते ही आरोपियों को मिली जमानत
दस्तक 7 मिडिया, बिरौल, दरभंगा।
बिरौल थाना क्षेत्र में ऑटो चालकों से जबरन और अवैध वसूली करने वाले एक बड़े सिंडिकेट के खिलाफ दर्ज मामले में उस वक्त एक नया और अप्रत्याशित मोड़ आ गया, जब मामले के मुख्य आवेदक (सूचक) ने खुद कोर्ट में उपस्थित होकर एक अलग ही सच्चाई बयां कर दी। सूचक के इस कदम के बाद न्यायालय ने गिरफ्तार सभी चारों आरोपियों को जमानत पर रिहा कर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार बिरौल थाना कांड संख्या 383/2026 के तहत पुलिस ने ऑटो चालकों से अवैध वसूली के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया था। मंगलवार को जांच अधिकारी (अनुसंधानकर्ता) ने गिरफ्तार आरोपी विष्णुदेव कूंवर, रामचंद्र सहनी, सिकन्दर मुखिया और संतोष कामती को न्यायालय में पेश किया।आरोपियों की पेशी के दौरान ही मामले के सूचक (आवेदक) जितेन्द्र चौधरी भी एसीजेएम बिरौल के न्यायालय में उपस्थित हुए। उन्होंने न्यायाधीश के समक्ष उपस्थित होकर एफआईआर दर्ज कराने के पीछे की “असली वजह और सच्चाई से कोर्ट को अवगत कराया। बताया जाता है कि सूचक के इस बयान के बाद मामले की गंभीरता बदल गई, जिसके तुरंत बाद माननीय एसीजेएम न्यायालय ने गिरफ्तार चारों आरोपियों को जमानत पर रिहा करने का आदेश दे दिया। पुलिस द्वारा सिंडिकेट के खिलाफ की गई त्वरित कार्रवाई और उसके तुरंत बाद कोर्ट में सूचक के इस ‘यू-टर्न’ ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय लोगों और ऑटो चालकों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इस मामले को लेकर कई अधिवक्ताओं ने कहा कि सरकार को लाखों रुपए राजस्व देने वाले एक प्रतिष्ठित संवेदक के विरुद्ध मामला सिर्फ अवैध वसूली से संबंधित था। पुलिस को सभी विन्दुओं पर अच्छे से जांच करने के बाद ही अग्रेतर कार्रवाई करना चाहिए। थानाध्यक्ष चन्द्र मणी ने बताया कि आवेदक जितेंद्र चौधरी के बयान पर एफआईआर दर्ज किया गया। सूचक ने न्यायालय के समक्ष आपस में समझौता करने की बात स्विकार लिया। उसके बाद माननीय न्यायालय से चारों आरोपियों को जमानत मिल गया।
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