सरकारी सिस्टम का ब्लंडर, जिंदा बुजुर्ग महिला को कागजों में मार डाला, KYC कराने पहुंची तो खुली पोल

दस्तक 7 मिडिया,बिरौल, दरभंगा।


बिहार के दरभंगा जिले से सरकारी सिस्टम की संवेदनहीनता और बड़ी लापरवाही का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक 76 वर्षीय जीवित बुजुर्ग महिला को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया। इस गड़बड़ी का खुलासा तब हुआ जब महिला खुद चलकर अपनी वृद्धा पेंशन का ई-केवाईसी (e-KYC) कराने पंचायत भवन पहुंचीं।यह अजीबोगरीब मामला बौराम प्रखंड क्षेत्र की कसरौर बसौली पंचायत का है। जानकारी के अनुसार कसरौर बसौली पंचायत की रहने वाली स्वर्गीय सुखदेव ठाकुर की पत्नी कमली देवी (76 वर्ष) पिछले कई वर्षों से नियमित रूप से राज्य सरकार की वृद्धा पेंशन योजना का लाभ ले रही थीं। हाल ही में सरकार के निर्देशानुसार लाभुकों के भौतिक सत्यापन और ई-केवाईसी की प्रक्रिया शुरू हुई। इसी सिलसिले में कमली देवी अपने परिजनों के साथ पंचायत भवन पहुंचीं। वहां उन्होंने पंचायत के मुखिया से अपना केवाईसी करने का अनुरोध किया। लेकिन जैसे ही ऑपरेटर ने सरकारी पोर्टल पर उनका डेटा और ऑनलाइन रिकॉर्ड चेक किया, तो सबके होश उड़ गए। सरकारी दस्तावेजों में कमली देवी के नाम के आगे मृत’ दर्ज था। खुद के मृत घोषित होने की खबर सुनते ही कमली देवी और उनका परिवार सदमे में आ गया। परिजनों का कहना है कि वे पूरी तरह स्वस्थ हैं और गांव में ही रह रही हैं, फिर भी बिना किसी जांच के उन्हें कागजों पर मृत दिखा दिया गया। इस लापरवाही के कारण उनकी पेंशन बंद होने की कगार पर है।
स्थानीय ग्रामीणों ने इस घटना पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है। डेटा अपडेट करने के नाम पर अक्सर ऐसी तकनीकी और मानवीय भूलें होती हैं, जिसका खामियाजा गरीब और बुजुर्गों को भुगतना पड़ता है। अगर समय रहते इस गड़बड़ी का पता नहीं चलता, तो एक जीवित महिला हमेशा के लिए सरकारी फाइलों में मृत ही रह जाती।
मामला सामने आने के बाद कसरौर बसौली पंचायत के मुखिया रंजित झा उर्फ गुड्डू झा ने तत्परता दिखाई है। उन्होंने बताया कि केवाईसी के दौरान ही इस बड़ी चूक का पता चला है। मुखिया ने कहा,यह बेहद गंभीर मामला है। इस संबंध में प्रखंड और जिला स्तर के संबंधित अधिकारियों को सूचित किया जा रहा है। सभी आवश्यक दस्तावेज और जीवित होने का प्रमाण उपलब्ध कराकर रिकॉर्ड में जल्द से जल्द सुधार कराया जाएगा, ताकि कमली देवी की पेंशन बिना किसी रुकावट के दोबारा शुरू हो सके।
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी विभागों के कामकाज, डेटा एंट्री ऑपरेटरों की लापरवाही और सत्यापन की प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह उठता है कि बिना किसी मृत्यु प्रमाण पत्र या ठोस जांच के किसी जीवित लाभार्थी को मृत कैसे घोषित कर दिया गया? ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि लापरवाह कर्मियों पर कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी गलतियों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।