“सैंया भये कोतवाल, अब डर काहे का ?”दरभंगा जिले के एसएसपी कार्यालय में तैनात आईटी प्रोग्रामर के रसूख ,कौन करेगा कारवाई ? सरकारी अभिलेखों और ऑडियो /व्हाट्स ऐप चैट के जांच से उठ सकता हे पर्दा ?डीआईजी के पत्र का भी नहीं हो रहा हे असर।
“सैंया भये कोतवाल, अब डर काहे का ?”दरभंगा जिले के एसएसपी कार्यालय में तैनात आईटी प्रोग्रामर के रसूख ,कौन करेगा कारवाई ? सरकारी अभिलेखों और ऑडियो /व्हाट्स ऐप चैट के जांच से उठ सकता हे पर्दा ?डीआईजी के पत्र का भी नहीं हो रहा हे असर।
“सैंया भये कोतवाल, अब डर काहे का ?”दरभंगा जिले के एसएसपी कार्यालय में तैनात आईटी प्रोग्रामर के रसूख ,कौन करेगा कारवाई ? सरकारी अभिलेखों और ऑडियो /व्हाट्स ऐप चैट के जांच से उठ सकता हे पर्दा ?डीआईजी के पत्र का भी नहीं हो रहा हे असर।
दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय
एक कहावत आपने सुनी होगी ,जब सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का ?यह कहावत दरभंगा के आईटी प्रोग्रामर निशांत कुमार पर सटीक बैठ रही हे ,यें इतने बड़े दिल फेंक हें जिनकी कहानी दरभंगा के हर एक थानों में गूंज रही हे ,यें पुलिस विभाग के कर्मी भी नहीं हे ,मानदेय पर तैनात हे लेकिन इनके किससे बहुत हे ?इतना सब कुछ होने के बाद भी इनपर कोई कारवाई नहीं हो रहा हे ,आखिर इनके सिर पर किनका हाथ हे ?
दरभंगा जिला के विभिन्न थानों में तैनात महिला कर्मी को अपने वश में करने के लिये आईटी प्रोग्रामर किस हद से गुजर जाते थे ,यह सुनेंगे तो आप दंग रह जाएंगे ,जी हाँ यह कोई कहानी नहीं हे हकीकत हे।इस बात का खुलासा एसएसपी कार्यालय के सीसीटीएनएस कार्यालय में मौजूद अभिलेखों के जांच से भी पता चल सकता हे ?
आखिर इस आईटी प्रोग्रामर के सिर पर किसका हाथ हे जो बिहार पुलिस में निजी कर्मी रहते हुये इतना रसूख रखता हे ?इसके पीछे कोई राजदार कहानी तो नहीं ,जो आम लोंगों के बीच सार्वजनिक नहीं हो रहा हे ,आखिर इस कर्मी में ऐसा क्या हे जिसपर कारवाई करने से सभी हिचक रहे हे ?वायरल हुये ऑडियो /चैट की जांच कहीं रद्दी के टोकरी में तो नहीं चला गया ?जो सरकारी नंबर से हुई हे ,जांचकर्ता को इससे ज्यादा सबूत और क्या चाहिये ,अगर और सबूत चाहिये तो तो उस महिला कर्मी समेत अन्य प्रताड़ित महिला कर्मी से पूछने पर सच्चाई सामने आ जाएगी।
महिला कर्मी को अपने वश में करने के लिये आईटी प्रोग्रामर कैसे प्रताड़ित करता था ,इसे समझने के लिये जांचकर्ता को उस अभिलेख को समझना पड़ेगा ,या देखना पड़ेगा जहा से सीसीटीएनएस में तैनात महिला कर्मी को कैसे चंद दिनों में यहा से वहां और वहां से यहां स्थानांतरण किया जाता था। आईटी प्रोग्रामर का यह दबाव पुलिस विभाग के कई महिला कर्मियों पर भी था लेकिन सभी चुप रहते थे ,क्यूंकि आका का हाथ सिर चढ़कर बोल रहा था ।
यहां बता दे कि जो महिला कर्मी आईटी प्रोग्रामर के प्रेम जाल में नहीं फंसता था उसे कैसे तंग तबाह किया जाता था ,जरा इसे समझिये –
महिला कर्मी ने इस पत्रकार से कहा कि जब उसने बात नहीं मानी तो आईटी प्रोग्रामर ने एक आदेश पत्र बनाकर अपने वरीय पदाधिकारी से हस्ताक्षर कराया ,और उसका स्थानांतरण महिला थाना से बहेड़ा थाना कर दिया ,जब बहेड़ा थाना में योगदान दी तो उसे लहेरियासराय में प्रतिनियुक्त किया गया ,अब एक महिला कर्मी बहेड़ा और लहेरियासराय यानी दो थाना में एक साथ डयूटी कैसे करें ?महिला कर्मी तंग और तबाह हो गई और मानसिक प्रताड़ना झेलने लगी ,महिला कर्मी ने बताया कि आईटी प्रोग्रामर ने कुछ महीनों बाद फिर उसे अपने कार्यालय में प्रतिनियुक्त कर लिया और दिल फेंकने लगा ?लेकिन दो माह तक बहेड़ा से लहेरियासराय थाना और लहेरियासराय से बहेड़ा थाना आ -जाकर मानसिक प्रताड़ना झेल रही थी ।अब इतने आदेश पत्र निकाले गये होंगे और सभी आदेश पर वरीय पुलिस पदाधिकारी के हस्ताक्षर भी हुये होंगे क्यूंकि इसी आदेश पर महिला कर्मी इधर से उधर और उधर से इधर करते रहे और आईटी प्रोग्रामर इसका आनंद लेते रहे।
हद तो तब हो गई जब उक्त महिला कर्मी को अपने कार्यालय में प्रतिनियुक्त किया इसमें भी आदेश पत्र निकला होगा ,इसके बाद लगातार आईटी प्रोग्रामर उक्त महिला कर्मी पर दिल फेंक रहा था ,महिला कर्मी ने थक हारकर उसका ऑडियो /व्हाट्स ऐप चैट को शेव किया जो बाद में वायरल हो गया। महिला कर्मी द्वारा बात नहीं मानने पर फिर उससे स्पष्टीकरण पूछा गया जिसका जवाब महिला कर्मी ने दे दिया।
ऑडियो वायरल होने के बाद मीडिया ने इस खबर को प्रमुखता से छापा तो फिलहाल मामला ठंडा पड़ गया हे ?यह तो एक उदाहरण हे और भी कई उदाहरण हे ,कई महिला कर्मी हे जिसके साथ ऐसा गलत व्यवहार किया गया और जिसने बात नहीं मानी उसे उस थाना से दूर फेंक दिया गया और जिस जिस ने बात मानी उसे सुदूर थाने से दरभंगा शहर के आस पास के थानों में प्रतिनियुक्त किया गया हे।
यही मामला अगर किसी सिपाही ,दरोगा ,इंस्पेक्टर का होता तो उसपर कारवाई करने में एसएसपी देर नहीं करते ?और कारवाई करते भी आयें हे।
बताया जाता हे कि आईटी प्रोग्रामर द्वारा कई थानेदारों पर भी रौब दिखाया जाता था ,सीसीटीएनएस प्रभारी पर भी रौब दिखाया जाता था और सभी डरे सहमे रहते थे।
वैसे आईटी प्रोग्रामर निशांत इस आरोप को एक सिरे से खारिज करते हे लेकिन डीआईजी द्वारा दिये गये जांच में ऑडियो /चैट और सरकारी अभिलेख का जांच हो तो वास्तविक सच्चाई से पर्दा हट सकता हे हालांकि ऑडियो और चैट सरकारी नंबर 9031827395 से हे जो सबूत के तौर पर ही काफी हे फिर कारवाई में देरी क्यों ?दस्तक 7मीडिया ऑडियो /चैट का समर्थन नहीं करता ,यह जांच का विषय हें ?