अंदामा मठ की 121 वर्ष पुरानी कबीरवाणी पांडुलिपियां बनीं शोध का केंद्र, ज्ञान भारतम मिशन की टीम ने किया सर्वेक्षण

दस्तक 7मीडिया /दरभंगा 

ज्ञान भारतम मिशन के तहत देशभर में चल रहे पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के अंतर्गत सोमवार को दरभंगा जिले के ऐतिहासिक अंदामा मठ का विस्तृत सर्वेक्षण किया गया। जिला पदाधिकारी कौशल कुमार के निर्देश पर आयोजित इस सर्वेक्षण में जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी चंदन कुमार के साथ नालंदा महाविहार से आए सहायक प्राध्यापक नैयंसी एवं लवकुश ने मठ में संरक्षित दुर्लभ हस्तलिखित ग्रंथों का अध्ययन किया।

सर्वेक्षण के दौरान अंदामा मठ की चौथी पीढ़ी के संरक्षक सुशील कुमार सिंह ‘साहब’, पांचवीं पीढ़ी के मदन कुमार सिंह, राम नरेश राय ‘साधु’, राजीव कुमार तथा विभिन्न स्थानों से आए कबीरपंथी साधु-संत उपस्थित रहे। टीम ने मठ में सुरक्षित वर्ष 1905 में संकलित हस्तलिखित ‘कबीरवाणी’ पांडुलिपियों का अवलोकन किया, जिनमें कबीर परंपरा के आध्यात्मिक विचार, समाज कल्याण और जीवन मूल्यों से जुड़े महत्वपूर्ण संदेश दर्ज हैं।

अधिकारियों ने बताया कि ज्ञान भारतम मिशन के तहत पूरे देश में पांडुलिपियों का सर्वेक्षण अंतिम चरण में है। इसके बाद इन दुर्लभ धरोहरों के डिजिटलीकरण एवं संरक्षण का कार्य शुरू किया जाएगा, जिससे भावी पीढ़ियों के लिए ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखा जा सके।

अंदामा मठ में संरक्षित इन ग्रंथों पर देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के शोधार्थियों द्वारा शोध कार्य भी किए जा चुके हैं। विशेष रूप से वर्ष 1998 में पूर्णंदु रंजन द्वारा प्रस्तुत “कबीरपंथ इन मिथिला” विषयक पीएचडी शोध को महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं राजीव कुमार ने भी मिथिला क्षेत्र के विभिन्न कबीरपंथी मठों पर विस्तृत लेखन कार्य किया है।

इन ग्रंथों की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इनके प्रभाव से प्रेरित होकर अमेरिकी अभियंता विलियम सीजर स्नेकी ने वैराग्य ग्रहण कर “केसरी दास” नाम धारण किया और वर्ष 1982 तक नौला मठ में अपना जीवन व्यतीत किया।

जिला प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि यदि किसी के पास प्राचीन पांडुलिपियों से संबंधित जानकारी उपलब्ध हो तो उसे ज्ञान भारतम मिशन पोर्टल पर साझा कर इस राष्ट्रीय सांस्कृतिक अभियान में सहयोग करें। यह पहल भारत की अमूल्य ज्ञान परंपरा को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।