चिकित्सा में एआई का बढ़ता महत्व, डॉक्टरों के लिए बना उपयोगी सहायक : डॉ. ओम प्रकाश

दस्तक 7मीडिया /अफजल खान 

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), दरभंगा की ओर से डॉक्टरों के लिए चिकित्सा क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें जिले के लगभग 50 वरिष्ठ चिकित्सकों ने भाग लिया और एआई के व्यावहारिक उपयोग, सीमाओं तथा रोगी गोपनीयता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. ओम प्रकाश ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता डॉक्टरों का स्थान नहीं ले सकती, लेकिन एआई की जानकारी रखने वाले डॉक्टर भविष्य में अधिक सक्षम और प्रभावी साबित होंगे। उन्होंने कहा कि एआई रोगी का रिकॉर्ड तैयार करने, बीमारी का विवरण लिखने, डिस्चार्ज सारांश बनाने, नुस्खों को व्यवस्थित करने, मरीजों को बेहतर तरीके से समझाने और पुराने दस्तावेजों के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

डॉ. ओम प्रकाश ने कहा कि एआई को सही तरीके से अपनाने पर यह डॉक्टर का मालिक नहीं, बल्कि एक आज्ञाकारी सहायक की तरह कार्य करेगा। उन्होंने रोगी की निजी जानकारी की सुरक्षा को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) कानून की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह कानून 11 अगस्त 2023 को संसद से पारित हुआ, इसके नियम 13 नवंबर 2025 को जारी किए गए तथा अनुपालन के लिए 18 माह की चरणबद्ध समय-सीमा निर्धारित की गई है।

उन्होंने कहा कि रोगी की निजी जानकारी की सुरक्षा में गंभीर लापरवाही होने पर 250 करोड़ रुपये तक का आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। ऐसे में सभी डॉक्टरों और चिकित्सा संस्थानों को डेटा सुरक्षा के प्रति विशेष सतर्कता बरतनी होगी।

डॉ. ओम प्रकाश ने कहा कि एआई का नैतिक और जिम्मेदार उपयोग चिकित्सा सेवाओं को अधिक सुरक्षित एवं प्रभावी बना सकता है। यह डॉक्टरों को समय रहते संभावित त्रुटियों, दस्तावेजों की कमियों और गंभीर रोगों के संकेतों के प्रति सचेत कर सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय और जिम्मेदारी हमेशा चिकित्सक की ही रहेगी।

कार्यक्रम का विषय-प्रवेश एवं स्वागत आईएपी के अध्यक्ष डॉ. कन्हैया झा ने किया। उन्होंने आईएमए अभिवादन भी प्रस्तुत किया। कार्यशाला में डॉ. ए.के. गुप्ता, डॉ. एस.एन. सर्राफ, डॉ. कुमुदनी झा, डॉ. शीला साहू, डॉ. मालती भगत सहित अनेक वरिष्ठ चिकित्सक उपस्थित रहे।

सत्र के दौरान चिकित्सकों ने एआई के उपयोग, रोगी गोपनीयता और डॉक्टरों की जिम्मेदारियों से जुड़े कई सवाल पूछे, जिनका डॉ. ओम प्रकाश ने सरल और व्यावहारिक भाषा में उत्तर दिया। कई प्रतिभागियों ने ऐसी कार्यशालाओं को छोटे समूहों में पुनः आयोजित करने की आवश्यकता जताई ताकि वे एआई के उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें।

अंत में आईएमए के सचिव डॉ. अंजार अहमद खान ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उपस्थित चिकित्सकों ने इस पहल को समय की मांग बताते हुए चिकित्सा क्षेत्र के लिए अत्यंत उपयोगी और प्रासंगिक बताया।