न्यायपालिका में हिंदी को लेकर पटना में गूंजा अधिवक्ताओं का स्वर, अधिवक्ता सुरक्षा कानून लागू करने की उठी मांग,

राज्य स्तरीय संगोष्ठी में विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार बोले- हिंदी को राष्ट्रभाषा बनने से कोई नहीं रोक सकता

दस्तक 7 मीडिया /दरभंगा 

बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन, पटना में शुक्रवार को “न्यायपालिका में हिंदी के प्रयोग” विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय संगोष्ठी एवं सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में न्यायपालिका में हिंदी के बढ़ते प्रयोग, अधिवक्ताओं की सुरक्षा, कल्याण और मातृभाषा में न्याय उपलब्ध कराने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार  ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हिंदी देश की आत्मा है और इसे राष्ट्रभाषा बनने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने न्यायिक व्यवस्था में हिंदी के व्यापक उपयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आम नागरिक को उसकी भाषा में न्याय मिलना लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।

संगोष्ठी की अध्यक्षता अखिल भारतीय अधिवक्ता कल्याण समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता धर्म नाथ प्रसाद यादव  ने की। उन्होंने कहा कि जब तक न्यायिक प्रक्रिया जनता की भाषा में संचालित नहीं होगी, तब तक न्याय आम लोगों के लिए पूरी तरह सुलभ नहीं हो सकेगा। उन्होंने न्यायपालिका में हिंदी के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग दोहराई।

अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम लागू करने की जोरदार मांग

संगोष्ठी के मुख्य वक्ता एवं समिति के राष्ट्रीय महामंत्री Sushil Kumar Chaudhary ने अधिवक्ताओं की सुरक्षा और सम्मान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि कर्तव्य निर्वहन के दौरान अधिवक्ताओं पर बढ़ते हमले, धमकी और उत्पीड़न चिंता का विषय हैं। उन्होंने बिहार में शीघ्र अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम लागू करने की मांग करते हुए कहा कि अधिवक्ताओं की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

मिथिला संस्कृति से हुआ अतिथियों का सम्मान

युवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार राज्य विधिज्ञ परिषद के पूर्व सदस्य पंकज कुमार  तथा राष्ट्रीय महामंत्री सुशील कुमार चौधरी के नेतृत्व में मंचासीन अतिथियों का मिथिला की पारंपरिक पाग, चादर और मखाना देकर सम्मान किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं को भी सम्मानित किया गया, जिससे पूरा सभागार मिथिला की सांस्कृतिक छटा से सराबोर दिखाई दिया।

पंकज कुमार ने कहा कि युवा अधिवक्ता हिंदी आंदोलन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे और न्याय मातृभाषा में सुनिश्चित कराने के लिए संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि न्यायालयों में हिंदी के प्रयोग संबंधी आदेशों का प्रभाव जमीन पर दिखाई देना चाहिए।

बिहार से उठी मशाल पूरे देश में फैलेगी’

समिति के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष रणविजय  सिंह  ने कहा कि अधिवक्ता समाज लोकतंत्र की रीढ़ है। न्याय की भाषा जनता की भाषा बनने से ही समानता और न्याय का सपना साकार होगा। उन्होंने कहा कि बिहार से शुरू हुआ यह अभियान राष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा देगा।

19 वरिष्ठ अधिवक्ता ‘अधिवक्ता-रत्न’ सम्मान से सम्मानित

सम्मेलन के दौरान 50 वर्षों से अधिक समय से विधि सेवा में योगदान देने वाले 19 वरिष्ठ अधिवक्ताओं को ‘अधिवक्ता-रत्न’ सम्मान प्रदान किया गया। सम्मानित होने वालों में सर्वेश नारायण सिंह, विन्ध्य केशरी कुमार, डॉ. उमाशंकर प्रसाद, उपेंद्र प्रसाद, नवल किशोर प्रसाद सिंह, स्वर्गीय गजेंद्र प्रसाद सिंह, आशुतोष कुमार, राम प्रवेश, ब्रज किशोर प्रसाद, राम विनय शर्मा, सुरेश प्रसाद निराला, रामचंद्र सिंह, नित्यानंद तिवारी, लक्ष्मी नारायण राय, परशुराम चौधरी, राम कृष्ण गिरि, नागेंद्र प्रसाद सिंह तथा धर्मनाथ प्रसाद यादव शामिल रहे।

कार्यक्रम का संचालन न्यायार्थी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष पृथ्वी राज यदुवंशी  ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ओम प्रकाश जमुआर ने किया। सम्मेलन में राज्यभर से आए सैकड़ों अधिवक्ताओं, विधि विशेषज्ञों और समिति के पदाधिकारियों ने भाग लिया।