दहेज हत्या के आरोप से 1 साल 10 माह बाद बरी: साक्ष्य के अभाव में ज्वाला खट्टीक को अदालत ने किया रिहा,

गर्भवती पत्नी की हत्या के आरोप में थे जेल में बंद, एडीजे कोर्ट ने सुनाया बरी करने का फैसला; परिवार बोला- “झूठे मुकदमे ने बर्बाद कर दी जिंदगी”

दरभंगा /विधि संवाददाता

एक वर्ष दस महिना 26 दिन से दहेज के लिए कथित गर्भवती पत्नी की हत्या के आरोप में दरभंगा मंडल में काराधीन ललित नारायण मिथिला विश्विद्यालय थाना क्षेत्र के गंगवारा निवासी ज्वाला खट्टीक को साक्ष्य के आभाव में शनिवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रंजन कुमार मिश्रा की अदालत ने रिहा किया। काराधीन ज्वाला खट्टीक की ओर से नि:शुल्क मुकदमा लड़ने वाले अधिवक्ता विनोद ठाकुर और धमेन्द्र लाल कर्ण ने बताया कि गंगवारा की राखी देवी ने 30 जून 2024 को विश्वविद्यालय थाना में अपना फर्दव्यान दर्ज कराकर प्राथमिकी संख्या 187/24 दर्ज कराकर ज्वाला खट्टीक और उसके वृद्ध माता द्रोपदी देवी को अभियुक्त बनायी थी। इस मामलें में अनुसंधानक के दबाव के चलते ज्वाला खट्टीक ने दिनांक 10 जूलाई 2024 को दरभंगा के प्रथम श्रेणी न्यायिक दण्डाधिकारी की अदालत में आत्मसमर्पण किया और कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। वहीं अनुसंधानक ने 7/10/24 को आरोप पत्र काराधीन आरोपी के विरुद्ध समर्पित किया तथा अदालत ने 28 अक्टूबर 2024 को संज्ञान लिया एवं एडीजे कोर्ट ने 25 नवम्बर 24 को आरोप गठन कर अभियोजन पक्ष से पांच साक्षियों का बयान लिया। इस मामले को ज्वाला खट्टीक की ब्याहता पत्नी रानी देवी और पुत्र सुमित कुमार ने लगातार कोर्ट में मुस्तैद रहा। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश श्री मिश्रा की अदालत ने साक्ष्य के आभाव में शनिवार को काराधीन ज्वाला खट्टीक को रिहा करने का निर्णय सुनाया। कोर्ट की निर्णय सुनकर ज्वाला खट्टीक की पत्नी रानी देवी और पुत्र सुमित कुमार ने रोते हुए बताया कि झूठा मुकदमा को लड़ने में परिवार को घोर आर्थिक संकट से गुजड़ना पड़ा है। लेकिन कोर्ट ने उनके परिवार के साथ न्याय किया है। वहीं अधिवक्ता द्वय ने नि:शुल्क मुकदमा लड़कर काराधीन ज्वाला के परिवार को न्याय दिलाने में सफल रहे।