” मोरो थाना में चौकीदार राज या व्यवस्था की मजबूरी ,बाप की जगह बेटा निभा रहा ड्यूटी! वर्दी, वाहन और रसूख को लेकर उठे कई सवाल,एक मशहूर गाना हे “बाप एक नंबरी तो बेटा दस नंबरी “डीजीपी के आदेश का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन ?
” मोरो थाना में चौकीदार राज या व्यवस्था की मजबूरी ,बाप की जगह बेटा निभा रहा ड्यूटी! वर्दी, वाहन और रसूख को लेकर उठे कई सवाल,एक मशहूर गाना हे “बाप एक नंबरी तो बेटा दस नंबरी “डीजीपी के आदेश का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन ?
” मोरो थाना में चौकीदार राज या व्यवस्था की मजबूरी ,बाप की जगह बेटा निभा रहा ड्यूटी! वर्दी, वाहन और रसूख को लेकर उठे कई सवाल,एक मशहूर गाना हे “बाप एक नंबरी तो बेटा दस नंबरी “डीजीपी के आदेश का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन।
दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय
हिंदी फिल्मों का चर्चित गीत हे “बाप एक नंबरी तो बेटा दस नंबरी” इन दिनों मोरो थाना क्षेत्र में यह गाना चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों के बीच यह गीत एक कथित व्यवस्था पर तंज के रूप में लिया जा रहा है। आरोप है कि मोरो थाना में कार्यरत चौकीदार नंद लाल पासवान की जगह उनका पुत्र चंदन पासवान वर्षों से विभिन्न जिम्मेदारियां निभाता दिखाई देता है ,और रसूख बड़े हे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि चंदन पासवान को कई बार थाना परिसर और पुलिस गतिविधियों के दौरान देखा गया है। आरोप यह भी है कि वह कभी-कभी पुलिस जैसी वर्दी में भी नजर आता है। इतना ही नहीं, थाना में लगे चारपहिया वाहन पर उसकी आवाजाही भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
निजी चालक या अनौपचारिक कर्मचारी?
क्षेत्र में चर्चा है कि चंदन पासवान थाना वाहन चलाने का भी काम करता है। लोगों का दावा है कि वह निजी चालक के तौर पर कार्य करता है। यदि यह सच है तो सवाल उठता है कि क्या किसी सरकारी थाना में बिना विधिवत नियुक्ति के किसी निजी व्यक्ति को सरकारी वाहन चलाने की अनुमति दी जा सकती है?
पुलिस मुख्यालय और डीजीपी स्तर से समय-समय पर निजी चालकों के उपयोग पर सख्त निर्देश जारी किए जाते रहे हैं। ऐसे में यदि किसी थाना में निजी व्यक्ति वाहन संचालन कर रहा है तो यह नियमों और सुरक्षा मानकों के लिहाज से गंभीर विषय है।
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वर्दी पहनने का अधिकार किसे?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कोई व्यक्ति पुलिस या चौकीदार जैसी वर्दी पहनकर घूम रहा है तो उसकी वैधानिक स्थिति क्या है? क्या उसे विभागीय अनुमति प्राप्त है? क्या वह अधिकृत कर्मचारी है या केवल अनौपचारिक रूप से कार्य कर रहा है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि अक्सर चंदन पासवान वर्दी में दिखाई पड़ता है। यदि ऐसा है तो इसकी जांच आवश्यक है कि वह किस अधिकार से वर्दी धारण करता है।
लेन-देन के आरोप, लेकिन प्रमाण नहीं
कुछ स्थानीय लोगों का आरोप है कि थाना आने वाले आगंतुकों और फरियादियों से चंदन पासवान का संपर्क रहता है और वह कथित तौर पर लेन-देन में भी भूमिका निभाता है। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में अब तक कोई ठोस या दस्तावेजी प्रमाण सामने नहीं आया है।
फेसबुक रील और सरकारी व्यवस्था
चर्चा यह भी है कि चंदन पासवान सोशल मीडिया, विशेषकर फेसबुक पर रील बनाने और थाना से जुड़े माहौल में वीडियो साझा करने से भी नहीं चूकता। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या किसी निजी व्यक्ति को थाना परिसर और सरकारी संसाधनों के बीच रील बनाकर फेसबुक पर वायरल करना कितना उचित और अनुचित हे ?
थानों की मजबूरी या नियमों की अनदेखी?
पुलिस सूत्रों के अनुसार कई जिलों में स्वीकृत चालकों की कमी एक वास्तविक समस्या है। कई बार थानाध्यक्षों को वाहन संचालन के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में कुछ स्थानों पर अनौपचारिक रूप से निजी चालकों की सेवाएं लेने की चर्चा भी सामने आती रही है।लेकिन प्रश्न यह है कि यदि चालक की कमी है तो विभाग वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं करता?क्या निजी चालक रखना डीजीपी के आदेशों का उल्लंघन नहीं है? किसी निजी व्यक्ति को सरकारी वाहन चलाने की अनुमति किसने दी?यदि कोई दुर्घटना हो जाए तो जवाबदेही किसकी होगी? सरकारी गोपनीयता और सुरक्षा से जुड़े मामलों का क्या होगा? चौकीदार की ड्यूटी उसके पुत्र द्वारा निभाना सेवा नियमों के अनुरूप है या नहीं? क्या विभाग इस पूरे मामले की जांच कराएगा?
जांच से ही सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल मोरो थाना को लेकर उठ रहे ये तमाम सवाल क्षेत्र में चर्चा का विषय बने हुए हैं। आरोपों की सत्यता की पुष्टि केवल सक्षम विभागीय जांच के बाद ही हो सकती है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह पुलिस व्यवस्था, सरकारी संसाधनों के उपयोग और सेवा नियमों के अनुपालन से जुड़ा गंभीर मामला साबित हो सकता है।
अब देखना यह होगा कि पुलिस के वरीय अधिकारी इन चर्चाओं और आरोपों को कितना गंभीरता से लेते हैं और क्या इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाती है या नहीं।
थानाध्यक्ष दिव्य ज्योति ने कहा कि ऐसी बात नहीं है और जहां तक गाड़ी चलाने की बात है सरकारी ड्राइवर नहीं रहने पर इमरजेंसी में उससे गाड़ी चलवाया गया है।
मंगलवार को इस पत्रकार ने थाने में खड़ी एक लाल रंग की चार चक्का वाहन को देखा था जिसपर ग्रामीण पुलिस लिखा था ,ऐसे में समझा जा सकता हे कि चौकीदार नंद लाल पासवान के बेटे चंदन पासवान का रसूख क्या हे ,एक तो बाप के जगह वर्दी में डयूटी निभाना और तेवर के साथ थाना में मौजूद रहना कई प्रश्नों के खुद व खुद में जवाब हे ?