जल निकासी की व्यवस्था न होने से नारकीय बनी ग्रामीणों की जिंदगी,बिरौल के उछटी पंचायत (वार्ड 7) का हाल
जल निकासी की व्यवस्था न होने से नारकीय बनी ग्रामीणों की जिंदगी,बिरौल के उछटी पंचायत (वार्ड 7) का हाल
जल निकासी की व्यवस्था न होने से नारकीय बनी ग्रामीणों की जिंदगी,बिरौल के उछटी पंचायत (वार्ड 7) का हाल
दस्तक 7 मिडिया, बिरौल दरभंगा।
विकास के तमाम दावों के बीच दरभंगा जिले के बिरौल प्रखंड अंतर्गत उछटी पंचायत के वार्ड नंबर 7 से एक ऐसी तस्वीर सामने आ रही है, जो स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता को बयां करने के लिए काफी है। इस वार्ड में जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण ग्रामीणों को भीषण जल-जमाव की समस्या से जूझना पड़ रहा है।
हालत यह है कि गाँव की मुख्य सड़क पानी में डूब चुकी है, जिससे लोगों का पैदल चलना भी मुहाल हो गया है।
स्थानीय ग्रामीणों में इस अव्यवस्था को लेकर भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि जब चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी के मौसम में सड़क का यह हाल है, तो आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि आने वाले बरसात के दिनों में यहाँ की स्थिति कितनी भयावह हो जाती होगी। मानसून आते ही यह इलाका पूरी तरह टापू में तब्दील हो जाता है।
हैरानी की बात यह है कि जिस रास्ते पर पानी लगा हुआ है, वह कोई कच्ची सड़क नहीं बल्कि पक्की पीसीसी निर्मित सड़क है। सरकार ने सड़क निर्माण पर लाखों-करोड़ों रुपये तो खर्च कर दिए, लेकिन इसके दोनों तरफ नाले का निर्माण कराना भूल गई। नतीजतन, घरों से निकलने वाला गंदा पानी और आम दिनों का जलजमाव सीधे सड़क पर इकट्ठा हो रहा है।
सड़क पर हफ़्तों से जमा गंदे पानी के कारण अब वहां से तीव्र दुर्गंध आने लगी है। इस वजह से इलाके में मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है और मलेरिया, डेंगू जैसी संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा पैदा हो गया है। गंदे पानी के बीच से होकर बच्चों को स्कूल और बुजुर्गों को डॉक्टर के पास जाना पड़ रहा है। आए दिन राहगीर और बाइक सवार इस जलजमाव के कारण अनियंत्रित होकर गिर रहे हैं और चोटिल हो रहे हैं।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस समस्या को लेकर कई बार पंचायत प्रतिनिधि और संबंधित अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया गया, लेकिन अब तक आश्वासन के सिवाय कुछ हासिल नहीं हुआ है। पंचायत के मुखिया मिथलेश कुमार ने बताया कि दो वर्ष पूर्व विधायक कुशेश्वरस्थान अमन भुषण हजारी के अनुशंसित पीसीसी सड़क का निर्माण किया गया है। लेकिन जल निकासी के लिए नाला बनाने के प्रति कोई पहल नहीं किया गया। मुखिया ने कहा नाला निर्माण होने के बाद ही यह समस्या का निदान हो सकता है।