बिहार में भ्रष्ट अफसरों पर चला सरकार का डंडा, एक हफ्ते में 23 राजस्व अधिकारियों पर कार्रवाई,

दाखिल-खारिज घोटाले, सरकारी जमीन की हेराफेरी और रिश्वतखोरी पर सख्ती; कई सीओ पर आरोप पत्र, वेतन वृद्धि रोकी गई, जांच के आदेश

दस्तक 7 मीडिया /पटना।

बिहार सरकार ने भूमि एवं राजस्व प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ते हुए एक सप्ताह के भीतर 23 राजस्व एवं अंचल अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल के निर्देश पर भ्रष्टाचार के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत यह सख्त कदम उठाया गया है।

विभाग ने पहले चरण में वित्तीय अनियमितता, लापरवाही और सरकारी कार्यों में गंभीर त्रुटियों के आरोप में 14 अंचल अधिकारियों (सीओ) के खिलाफ आरोप पत्र गठित किया था। इनमें एक अधिकारी को सरकारी भूमि को निजी व्यक्ति के नाम दर्ज कराने के मामले में निलंबित भी किया गया।

कार्रवाई के दूसरे चरण में आठ अन्य अंचल एवं राजस्व अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई, वेतन वृद्धि रोकने तथा विशेष जांच के आदेश जारी किए गए हैं। विभाग का कहना है कि जमीन संबंधी मामलों में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जांच में कई गंभीर मामले सामने आए हैं। आरोप है कि कुछ अधिकारियों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी जमीन का दाखिल-खारिज कर निजी व्यक्तियों को लाभ पहुंचाया। वहीं म्यूटेशन अपीलों को जानबूझकर लंबित रखकर रिश्वत लेने और भू-माफियाओं को संरक्षण देने के आरोप भी लगे हैं। इसके अलावा बाढ़ राहत कोष और सरकारी योजनाओं से जुड़ी राशि में वित्तीय गड़बड़ी के मामले भी उजागर हुए हैं।

कार्रवाई की जद में आए प्रमुख अधिकारियों में डेहरी की सेवानिवृत्त सीओ सीमा रानी, बक्सर के इटाढ़ी सीओ संतोष कुमार प्रीतम, बरौली के पूर्व राजस्व अधिकारी विजय कुमार सिंह, मोतीपुर की पूर्व सीओ रुचि कुमारी तथा सुपौल के अपर जिला भू-अर्जन पदाधिकारी चंदन कुमार शामिल हैं। इन अधिकारियों पर सरकारी भूमि रिकॉर्ड में गड़बड़ी, अवैध म्यूटेशन, रिश्वतखोरी और राहत राशि में अनियमितता जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।