मोरो थाना या फिर पुलिस अधिकारियों का दालान ,हालांकि भाड़े पर हे थाने का मकान ? खैनी का मजा लेते दिखे अफसर,वह भी हाफ पेंट और गंजी में ? यही नहीं शराब तस्करों पर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूरी ?
मोरो थाना या फिर पुलिस अधिकारियों का दालान ,हालांकि भाड़े पर हे थाने का मकान ? खैनी का मजा लेते दिखे अफसर,वह भी हाफ पेंट और गंजी में ? यही नहीं शराब तस्करों पर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूरी ?
मोरो थाना या फिर पुलिस अधिकारियों का दालान ,हालांकि भाड़े पर हे थाने का मकान ? खैनी का मजा लेते दिखे अफसर,वह भी हाफ पेंट और गंजी में ? यही नहीं शराब तस्करों पर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूरी ? दस्तक 7 मीडिया /संजय कुमार राय
दरभंगा जिला का मोरों थाना ,जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर,बस शांतिः ही शांति ,लेकिन शराब माफियाओं का सेफ जॉन ?सड़कें ऐसी की मुजफ्फरपुर से बेनीबाद होते हुये लूप लाईन ,जो विशनपुर चौक पर निकलती हे ,ना कोई रोक ,ना कोई टोक ?पटोरी गांव से सटे आगे चौक ,चौक से गुजरते लोग। चौक पर खड़े होते ही एक दुकान पर मोटरसाईकिल का रुकना और जाना ,कम उम्र के लड़के नशे में धुत्त ?कई बगीचों में सूखे नशे की चौखरी ,तो छोटी छोटी दुकानों में फ्रूटी जैसी कोई चीज ,पता करने पर लोंगों ने सही जानकारी नहीं दी और खुलकर बोलने से सभी ने परहेज किया । जब दस्तक 7मीडिया की टीम उस चौक से मुड़कर थाने पर गई ,तो नजारा कुछ और था ,ऐसा लग रहा था कि यह थाना नहीं गांव का दालान हे ?हालांकि वह दालान ही हे और किराए के भवन में थाना चल रहा हे।
दस्तक 7मीडिया की टीम मंगलवार शाम करीब 5 बजे ग्राउंड जीरो का रियलिटी चेक करने मोरो थाना परिसर पहुंची। वहां की अव्यवस्था और सुस्ती देखकर हैरान थे ।एक पुलिस पदाधिकारी बैठे थे वह थोड़ा जिम्मेदार दिखे ,वहीं एक पदाधिकारी हाफ पेंट और गंजी में दिखे ?खैनी का मजा ले रहे थे अन्य कुर्सिया खाली थी।
थानाध्यक्ष भी थाने पर मौजूद नहीं थीं। उनकी गैर-मौजूदगी में सुरक्षा रामभरोसे था। हद तो तब हो गई जब वहां मौजूद एक पुलिस पदाधिकारी ऑन-ड्यूटी मर्यादा भूलकर हाफ पैंट और गंजी पहने, पैर पर पैर चढ़ाकर आराम से मोबाइल पर बात करने में व्यस्त दिखे। इतना ही नहीं, सरकारी वर्दी और कर्तव्य से बेपरवाह होकर वे हाथ में खैनी-चूना मलने में मशगूल थे।
वहां बैठे एक अन्य पुलिस पदाधिकारी से परिचय हुआ ,उक्त पुलिस अधिकारी ने थानाध्यक्ष को सूचना दी ,सूचना के 10 मिनट बाद ही थानाध्यक्ष दिव्य ज्योति थाने पहुंचीं। उनसे भी परिचय हुआ।
बातचीत के दौरान उन्होंने चाय-पानी का प्रबंध करवाया।
लेकिन, जैसे ही उनसे बीते एक साल में शराब बरामदगी और शराब माफियाओं के खिलाफ की गई कार्रवाई का ठोस आंकड़ा मांगा , वे बगल में झांकने लगीं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि “रिकॉर्ड देखने में समय लगेगा।”वहां एक बात और पता चला कि वह चकमेह्सि थाना में रह चुकी हे ?और चकमेह्सि का ही एक कुख्यात शराब तस्कर हे जिसका बड़े पैमाने पर खेल हे ?उसपर कई प्राथमिकी भी दर्ज हे और कई बार जेल भी जा चुका हे ,बावजूद लोग कहते हे कि कई थाना क्षेत्रों में उसके शराब की डिलीवरी होती हे ?थानाध्यक्ष दिव्य ज्योति ने भी कहा कि उस शराब माफिया पर पहले कारवाई कर चुकी हे।
इस पत्रकार को जो जानकारी अब तक मिली हे उसमें 16/10/2025 7 लीटर,03/12/2025)को 4 लीटर ,
03/03/2026)को 11लीटर देशी /विदेशी मिलाकर ,04/03/2026)7.875 लीटर देशी /विदेशी शराब हे,और भी आंकड़े हो सकते हे ?लेकिन कई महीनों से शराब बरामदगी नहीं हुई हे।
अगर यह आंकड़ा हे तो इन आंकड़ों से साफ है कि महीनों के कार्यकाल में पुलिस केवल कुछ लीटर शराब पकड़कर अपनी पीठ थपथपा रही है, जबकि इलाके में लोंगों का कहना हे कि बड़े पैमाने पर कथित रूप से देशी /विदेशी शराब की तस्करी जारी है। थानाध्यक्ष दिव्य ज्योति ने कहा कि वह हमेशा भरसक प्रयास करती हे कि शराब माफियाओं को दबोचे ,उन्होंने कहा कि थाने की पुलिस भी शराब बरामदगी के लिये दौड़ती हे लेकिन उपलब्धि नहीं हो पाता हे।पटोंरी/मोरों गांव के कई लोंगों ने यह भी कहा कि तात्कालीन थानाध्यक्ष से वर्तमान थानाध्यक्ष काम के प्रति काफी जागरूक हे।
वहीं इस थाने पर लाल रंग की चार पहिया गाड़ी दिखाई पड़ी जिसपर ग्रामीण पुलिस लिखा था ,मतलब चौकीदार का होगा ?इससे भी समझा जा सकता हे कि एक चौकीदार का रसूख कितना हे , तो पुलिस वालों का क्या हो सकता हे ?
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