रिशु श्री टेंडर घोटाला में कई आईएस एवं अन्य रडार पर , दो आईएस अब तक निलंबित, करोड़ों की संपत्ति हुई थी जब्त, ईडी एसवीयू की संयुक्त कार्रवाई से बिहार में मचा हड़कंप, सरकारी ठेकों में बड़े भ्रष्टाचार के खुलासे का दावा
रिशु श्री टेंडर घोटाला में कई आईएस एवं अन्य रडार पर , दो आईएस अब तक निलंबित, करोड़ों की संपत्ति हुई थी जब्त, ईडी एसवीयू की संयुक्त कार्रवाई से बिहार में मचा हड़कंप, सरकारी ठेकों में बड़े भ्रष्टाचार के खुलासे का दावा
रिशु श्री टेंडर घोटाला में कई आईएस एवं अन्य रडार पर , दो आईएस अब तक निलंबित, करोड़ों की संपत्ति हुई थी जब्त,
ईडी एसवीयू की संयुक्त कार्रवाई से बिहार में मचा हड़कंप, सरकारी ठेकों में बड़े भ्रष्टाचार के खुलासे का दावा
दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय
बिहार के बहुचर्चित रिशु श्री टेंडर घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और विशेष निगरानी इकाई (SVU) की कार्रवाई ने प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है। सरकारी ठेकों में कथित अनियमितता, कमीशनखोरी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े इस मामले में अब तक कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार ने दो वरिष्ठ IAS अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, जबकि तीन IAS अधिकारियों समेत करीब एक दर्जन सरकारी अधिकारी जांच एजेंसियों के रडार पर बताए जा रहे हैं।
जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के अनुसार, सरकारी टेंडरों की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर हेराफेरी कर करोड़ों रुपये का अवैध नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। इस नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड ठेकेदार रिशु श्री उर्फ ऋषु रंजन सिन्हा को माना जा रहा है, जिसे SVU ने पटना के मीठापुर स्थित उसके आवास से गिरफ्तार किया था।
दो IAS अधिकारियों पर गिरी गाज,और कई रडार पर
जांच में सामने आए आरोपों के बाद 2017 बैच के IAS अधिकारी योगेश कुमार सागर को निलंबित कर दिया गया । उन पर आरोप है कि उन्होंने एक ठेकेदार के खर्च पर अपने परिवार के साथ लगभग 22 लाख रुपये की यूरोप यात्रा की और अन्य वित्तीय लाभ भी प्राप्त किए।
वहीं IAS अधिकारी अभिलाषा कुमारी शर्मा पर भी ठेकेदार से महंगे उपहार और सुविधाएं लेने के आरोप लगे हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार उनके लिए महंगे आईफोन खरीदने के साथ-साथ आवास की छत पर लगभग 9 लाख रुपये की लागत से रूफटॉप गार्डन भी बनवाया गया। इन आरोपों के आधार पर उन्हें भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
ऐसे चलता था कथित भ्रष्टाचार का खेल
जांच एजेंसियों का दावा है कि रिशु श्री ने कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मिलकर सरकारी ठेकों का एक संगठित नेटवर्क तैयार कर रखा था। आरोप है कि टेंडर जारी होने से पहले ही उससे जुड़ी गोपनीय जानकारी और शर्तें रिशु श्री तक पहुंचा दी जाती थीं।
इसके बाद संबंधित ठेकेदारों को टेंडर दिलाने के बदले लगभग 9 प्रतिशत कमीशन वसूला जाता था। जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि इस राशि का एक हिस्सा संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया जाता था। इससे सरकारी निविदा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
कई विभागों के ठेके जांच के दायरे में
जांच एजेंसियों की नजर विशेष रूप से जल संसाधन विभाग, नगर विकास विभाग, भवन निर्माण विभाग तथा स्वच्छ गंगा मिशन से जुड़े ठेकों पर है। माना जा रहा है कि इन विभागों में करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट्स में अनियमितताएं हुई हैं।
अधिकारियों का कहना है कि टेंडर आवंटन से लेकर भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया की जांच की जा रही है। कई दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी खंगाला जा रहा है।
छापेमारी में करोड़ों की संपत्ति का हुआ था खुलासा
ED और SVU की संयुक्त छापेमारी में रिशु श्री के विभिन्न ठिकानों से भारी मात्रा में संपत्ति और दस्तावेज बरामद किए गए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार लगभग 4 करोड़ रुपये मूल्य के सोने के आभूषण, बड़ी मात्रा में नकदी तथा 61 जमीनों से जुड़े दस्तावेज मिले हैं।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि रिशु श्री ने कथित रूप से भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी और हवाला के जरिए 25 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति अर्जित की है। हालांकि वास्तविक आंकड़ा जांच पूरी होने के बाद और बढ़ सकता है।
कंपनियों और बैंक खातों की पड़ताल
मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू को देखते हुए ED ने रिशु श्री से जुड़ी आधा दर्जन से अधिक कंपनियों और निजी बैंक खातों की जांच शुरू कर दी है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि अवैध रूप से अर्जित धन को किन माध्यमों से निवेश और ट्रांसफर किया गया।
सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में इस मामले में कई और अधिकारियों, कारोबारियों तथा प्रभावशाली लोगों से पूछताछ हो सकती है। जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है और नए खुलासों की संभावना बनी हुई है।
बिहार के प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय
रिशु श्री टेंडर घोटाला फिलहाल बिहार के सबसे चर्चित मामलों में शामिल हो गया है। दो IAS अधिकारियों के निलंबन और करोड़ों रुपये की संपत्ति के खुलासे ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर ED और SVU की अगली कार्रवाई पर टिकी है, क्योंकि जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की परत-दर-परत जांच में जुटी हुई हैं।