थानाध्यक्ष पर गौ तस्करी के वाहन को छोड़ने का आरोप,एसडीपीओ ने जांच के बाद आरोपों को बताया पूरी तरह ‘निराधार, अफवाह फैलाने वाले के विरुद्ध कार्रवाई का निर्देश

दस्तक 7 मिडिया, बिरौल, दरभंगा।

घनश्यामपुर थाना क्षेत्र में गौवंश से लदे एक पिकअप वाहन को बिना कानूनी कार्रवाई के छोड़ने का मामला अब तूल पकड़ चुका है। एक तरफ जहां स्थानीय ग्रामीण ने दरभंगा के एसएसपी को आवेदन देकर थानाध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं दूसरी तरफ अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी ने प्रेस वार्ता कर इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद और निराधार करार दिया है।


थाना क्षेत्र के बसोली गांव निवासी शिकायतकर्ता कुलानंद यादव ने एसएसपी दरभंगा को सौंपे गए आवेदन में घनश्यामपुर थानाध्यक्ष आलोक कुमार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
घटना 24 मई की देर शाम, ग्रामीणों ने रसियारी चौक के समीप गाय और बछड़ों से लदे एक पिकअप वाहन BR 07 GB 7389 को पकड़ा था। ग्रामीणों ने वाहन को सुरक्षित घनश्यामपुर पुलिस के हवाले किया था। रात तक वाहन थाना परिसर में ही खड़ा था, लेकिन अगले दिन सुबह वाहन और गौवंश दोनों वहां से गायब थे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि थानाध्यक्ष ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच थाना परिसर में लगे सीसीटीवी फुटेज के आधार पर करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए बिरौल के एसडीपीओ प्रभाकर तिवारी ने एक प्रेस वार्ता आयोजित कर वस्तुस्थिति स्पष्ट की। उन्होंने जांच रिपोर्ट के हवाले से थानाध्यक्ष पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
कुलानंद यादव के आवेदन पर त्वरित जांच की गई। जांच के दौरान पिकअप वाहन और उसके मालिक को थाने पर बुलाकर गहन पूछताछ की गई। यह मामला गौ तस्करी का नहीं, बल्कि निजी पशुपालन का है।
पिकअप वाहन के मालिक की पहचान जमालपुर थाना क्षेत्र के झगरुआ गांव निवासी किशुन साहू के रूप में हुई है। पूछताछ में पता चला कि किशुन साहू ने भगवानपुर गांव से दो गाय और एक बछड़ा खेती-बाड़ी और दूध उत्पादन (पशुपालन) के उद्देश्य से खरीदा था। रसियारी पुल के पास ग्रामीणों ने गलतफहमी में वाहन को रोका था। पुलिस द्वारा सभी वैध दस्तावेजों और तथ्यों का सत्यापन करने के बाद वाहन और पशुओं को पीआर बॉन्ड पर छोड़ा गया था।
एसडीपीओ प्रभाकर तिवारी ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि जांच में गौ तस्करी की पुष्टि नहीं हुई है और थानाध्यक्ष आलोक कुमार पर लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना तथ्यों की जांच किए भ्रामक खबरें या सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वाले तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।