नगर पंचायत बिरौल, कागजों पर ‘शहरी’ बने उपभोक्ता, पर रसोई गैस मिल रही आज भी ‘ग्रामीण’ नियमों से,

वार्ड पार्षदों की उदासीनता से सैकड़ों उपभोक्ता परेशान,शहरी वितरक केंद्र से जोड़ने या सर्वे कराने की मांग उठी।

दस्तक 7 मिडिया, उत्तम सेनगुप्ता, दरभंगा।

बिहार सरकार के निर्देशों के बाद ग्रामीण क्षेत्रों का शहरीकरण तो कर दिया गया, लेकिन बुनियादी सरकारी व्यवस्थाएं आज भी पुराने ढर्रे पर चल रही हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण अनुमंडल मुख्यालय अंतर्गत नगर पंचायत बिरौल में देखने को मिल रहा है, जहां सैकड़ों उपभोक्ता आज भी ‘शहरी’ की जगह ‘ग्रामीण’ एलपीजी गैस वितरण प्रणाली का दंश झेलने को मजबूर हैं। शासन-प्रशासन की इस ढुलमुल नीति के खिलाफ अब स्थानीय उपभोक्ताओं में आक्रोश पनपने लगा है।

स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि जब इस क्षेत्र में एलपीजी गैस का ग्रामीण वितरण केंद्र चालू किया गया था, उस वक्त अफजला पूरी तरह से ग्रामीण क्षेत्र के अंतर्गत आता था। ग्रामीण नियमों के तहत ही वहां गैस की आपूर्ति तय की गई थी। लेकिन वर्तमान समय में यह पूरा इलाका नगर पंचायत बिरौल में तब्दील हो चुका है।
बड़ा सवाल–
क्षेत्र के नगर पंचायत बनने के बाद यहां के निवासियों को हर स्तर पर शहरी सुविधाएं मिलनी चाहिए थीं, लेकिन रसोई गैस के मामले में आज भी उपभोक्ताओं को ग्रामीण नियमों के चक्रव्यूह में फंसाकर रखा गया है। इस पूरी अव्यवस्था को लेकर उपभोक्ताओं का सबसे ज्यादा गुस्सा स्थानीय वार्ड पार्षदों पर फूट रहा है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि उन्हें शहरी गैस उपभोक्ताओं वाली सुविधाएं मुहैया करवाने का दायित्व नगर पंचायत प्रशासन और स्थानीय वार्ड पार्षदों का है। लेकिन विडंबना यह है कि स्थानीय वार्ड पार्षद जनता से जुड़ी इस बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण समस्या को लेकर पूरी तरह उदासीन बने हुए हैं।
समय पर डिलीवरी न होना– ग्रामीण वितरक केंद्रों का दायरा बड़ा और ढांचा अलग होने के कारण उपभोक्ताओं को निर्धारित समय सीमा पर रसोई गैस नहीं मिल पाती।
शहरी सुविधाओं से महरुमी– नगर पंचायत के अंतर्गत आने के बावजूद उपभोक्ता उन होम-डिलीवरी और त्वरित सेवाओं से वंचित हैं, जो एक शहरी उपभोक्ता का अधिकार हैं।
उपभोक्ताओं ने रखी दो टूक मांग–
परेशान नगरवासियों ने इस समस्या के त्वरित निष्पादन के लिए प्रशासन और गैस कंपनियों के समक्ष दो मुख्य विकल्प रखे हैं।
1.वर्तमान ग्रामीण वितरक केंद्र के अंतर्गत आने वाले नगर पंचायत के उपभोक्ताओं का नए सिरे से सर्वे किया जाए और उन्हें शहरी उपभोक्ताओं की तर्ज पर सुविधाएं व प्राथमिकता दी जाए।
2.शहरी वितरक केंद्र से जोड़ा जाए या फिर, इन सैकड़ों उपभोक्ताओं को सीधे किसी नजदीकी शहरी एलपीजी गैस वितरण केंद्र से टैग कर दिया जाए, ताकि निर्धारित समय सीमा के भीतर रसोई गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।
यदि नगर पंचायत प्रशासन और संबंधित विभाग ने इस जन-समस्या पर जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं का यह आक्रोश किसी बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। अब देखना यह है कि कुंभकर्णी नींद में सोया नगर प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब जागता है।