बिरौल उप प्रमुख अर्पणा कुमारी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर लगी रोक, उच्च न्यायालय के आदेश पर हुई जांच
बिरौल उप प्रमुख अर्पणा कुमारी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर लगी रोक, उच्च न्यायालय के आदेश पर हुई जांच
बिरौल उप प्रमुख अर्पणा कुमारी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर लगी रोक, उच्च न्यायालय के आदेश पर हुई जांच
दस्तक 7 मिडिया, उत्तम सेनगुप्ता, दरभंगा।
समाहरणालय दरभंगा (जिला पंचायत प्रशाखा) द्वारा जारी एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, बिरौल प्रखंड की उप प्रमुख अर्पणा कुमारी के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव कानूनी नियमों के उल्लंघन के कारण अधर में लटक गया है। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा याचिका CWJC No-8393/2026 में दिए गए निर्देश के बाद जिला प्रशासन द्वारा गठित त्रिसदस्यीय जांच कमेटी ने इस पूरे मामले में कई गंभीर प्रशासनिक और कानूनी कमियां पाई हैं।
याचिकाकर्ता अर्पणा कुमारी (उप प्रमुख, प्रखंड बिरौल) द्वारा दी गई अर्जी और त्रिसदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट में निम्नलिखित प्रमुख बातें सामने आई हैं। जिसमें बिहार पंचायती राज अधिनियम की धारा 46(4) के तहत किसी भी विशेष बैठक के लिए स्पष्ट रूप से 7 दिन पहले सूचना दी जानी अनिवार्य है। आगामी 29.05.2026 को निर्धारित बैठक की सूचना याचिकाकर्ता को समय सीमा के भीतर उपलब्ध नहीं कराई गई। उप प्रमुख को विशेष बैठक की सूचना (तामिला) तो दिनांक 22.05.2026 को कराई गई, लेकिन उसके साथ पंचायत समिति सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित अविश्वास प्रस्ताव की मूल प्रति संलग्न नहीं थी, जो कि अधिनियम की धारा-44(3) का सीधा उल्लंघन है। बिहार पंचायत राज अधिनियम-2006 के नियम-44(3)(ii) (यथा संशोधित 2015) के अनुसार, प्रमुख या उप प्रमुख के पूरे कार्यकाल में ऐसा कोई अविश्वास प्रस्ताव सिर्फ एक बार ही लाया जा सकता है। इससे पूर्व दिनांक 09.02.2024 को भी अर्पणा कुमारी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था, जिसमें कुल 35 सदस्यों में से मात्र दो सदस्य उपस्थित हुए थे और मत विभाजन की कार्रवाई नहीं हो सकी थी। नियमानुसार, एक बार प्रस्ताव खारिज होने के बाद दोबारा ऐसा प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता।
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब श्री बिहारी प्रसाद ठाकुर एवं अन्य 12 पंचायत समिति सदस्यों द्वारा उप प्रमुख अर्पणा कुमारी के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव से संबंधित अधियाचना प्रखंड प्रमुख को सौंपी गई थी। इसके आलोक में कार्यपालक पदाधिकारी-सह-प्रखंड विकास पदाधिकारी, बिरौल द्वारा 29.05.2026 को विशेष बैठक बुलाई गई थी। उच्च न्यायालय के आदेश (दिनांक 27.05.2026) के बाद आनन-फानन में 28.05.2026 को त्रिसदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कर दिया है कि अविश्वास प्रस्ताव की बैठक की सूचना के साथ प्रस्ताव की प्रति न सौंपना और स्पष्ट 7 दिन पूर्व सूचना न देना पूरी तरह से स्थापित नियमों के खिलाफ है।
इस जांच रिपोर्ट के बाद अब 29 मई 2026 को होने वाली विशेष बैठक और अविश्वास प्रस्ताव की वैधानिकता पर पूरी तरह से विराम लग गया है, जिससे उप प्रमुख अर्पणा कुमारी को बड़ी राहत मिली है।
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