एसएसपी कार्यालय का आईटी प्रोग्रामर विवादों में: अवैध उगाही, महिला कर्मियों से दुर्व्यवहार और दबंगई के गंभीर आरोप,जांच के घेरे में आईटी शाखा, डीआईजी ने नगर पुलिस अधीक्षक को सौंपी जांच

दस्तक 7 मीडिया /संजय कुमार राय 

जिला पुलिस मुख्यालय में पदस्थापित आईटी प्रोग्रामर निशांत कुमार पर लगे गंभीर आरोपों ने पुलिस विभाग में हलचल मचा दी है। अब तक “दिलफेंक” छवि को लेकर चर्चा में रहने वाला यह आईटी प्रोग्रामर अब अवैध उगाही, महिला पुलिस कर्मियों को प्रताड़ित करने, थानेदारों पर दबाव बनाने तथा विभागीय अनुशासन को चुनौती देने जैसे संगीन आरोपों के कारण सुर्खियों में है।

सूत्रों के अनुसार, हाल ही में जिले के विभिन्न थानों में एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर को जोड़ने के लिए “लैपटॉप मैपिंग” कार्य कराया गया था। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों के कई थानों से प्रति कंप्यूटर 500 रुपये की अवैध वसूली किए जाने का आरोप सामने आया है। बताया जाता है कि जिन थानों में अधिक कंप्यूटर थे, वहां से हजारों रुपये तक की वसूली की गई।

कई थानेदारों ने दबी जुबान में स्वीकार किया कि आईटी प्रोग्रामर द्वारा दबाव बनाकर पैसे लिए गए। जब उनसे पूछा गया कि इसकी शिकायत वरीय अधिकारियों से क्यों नहीं की गई, तो कुछ अधिकारियों ने कहा कि शिकायत करने पर वे स्वयं निशाने पर आ जाते।

महिला कर्मियों से दुर्व्यवहार के आरोप

मामले का सबसे गंभीर पक्ष महिला पुलिस कर्मियों से जुड़े आरोप हैं। विभिन्न थानों में सीसीटीएनएस शाखा में कार्यरत महिला कर्मियों ने नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि आईटी प्रोग्रामर द्वारा उन पर अनावश्यक दबाव बनाया जाता था। आरोप है कि कथित “प्रेम जाल” में फंसाने का प्रयास किया जाता था और विरोध करने पर स्पष्टीकरण पूछकर या स्थानांतरण कर प्रताड़ित किया जाता था।

सूत्रों का कहना है कि एसएसपी कार्यालय के अभिलेखों की जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि कितनी महिला कर्मियों से स्पष्टीकरण पूछा गया और कितनों को संबंधित थानों से हटाया गया।

बताया जा रहा है कि कार्यरत एक महिला कर्मी ने हिम्मत दिखाते हुए बातचीत का ऑडियो रिकॉर्ड किया, जो बाद में वायरल हो गया। सरकारी नंबर पर हुई बातचीत के प्रमाण भी उपलब्ध होने की चर्चा है।

थानेदारों पर दबाव और जासूसी का आरोप

पुलिस सूत्रों के अनुसार, आईटी प्रोग्रामर का प्रभाव इतना बढ़ गया था कि कई थानेदार भी उसके व्यवहार से असहज रहते थे। आरोप है कि कुछ महिला कर्मियों के माध्यम से थानों की आंतरिक जानकारी जुटाई जाती थी और बाद में संबंधित थानेदारों पर दबाव बनाया जाता था।

इस माहौल में कई महिला कर्मियों ने खुद को असुरक्षित महसूस करने की बात कही है। उनका कहना है कि यदि ऐसे लोगों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो महिला पुलिसकर्मियों के लिए स्वतंत्र और सुरक्षित वातावरण में काम करना मुश्किल हो जाएगा।

डीआईजी ने लिया संज्ञान

मामला मीडिया में आने के बाद मिथिला क्षेत्र के डीआईजी मनोज कुमार तिवारी ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच का जिम्मा नगर पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार  को सौंप दिया है। अब विभागीय स्तर पर ऑडियो, व्हाट्सएप चैट और सरकारी नंबर से हुई व्हाट्स ऐप बातचीत की सत्यता की जांच करना आवश्यक हे ताकि मामलों से पर्दा उठ सके।हालांकि दस्तक 7मीडिया ऑडियो की पुष्टि नहीं करता हे यह जांच का मामला हे ?

पुलिस विभाग के अंदर भी यह चर्चा तेज है कि आखिर एक आईटी प्रोग्रामर को इतनी शक्ति और संरक्षण कहां से मिल रहा था कि वह लंबे समय तक खुलेआम दबंगई करता रहा।

महिला कर्मियों की मांग -हो सख्त कार्रवाई

कई महिला पुलिसकर्मियों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मी के विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई, यहां तक कि बर्खास्तगी तक की कार्रवाई होनी चाहिए। उनका मानना है कि केवल स्थानांतरण करने से समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि ऐसे मामलों में उदाहरण प्रस्तुत करने वाली कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी या कर्मी अपने पद का दुरुपयोग करने की हिम्मत न कर सके।