सीसीटीएनएस का रोमियो बाबू रडार  पर  ,डीआईजी की नजर: महिला सिपाहियों से कथित छेड़छाड़ मामले में जांच शुरू,

दस्तक 7 मीडिया की खबर का असर, नगर एसपी को सौंपी गई जांच

दस्तक 7 मीडिया /संजय कुमार राय 

पुलिस विभाग में तैनात महिला सिपाहियों के बीच लंबे समय से चर्चा का विषय बने आईटी प्रोग्रामर निशांत कुमार की मुश्किलें अब बढ़ती नजर जा  रही हैं। मिथिला क्षेत्र के डीआईजी मनोज कुमार तिवारी ने पूरे मामले पर संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। जानकारी के अनुसार, मामले की जांच नगर पुलिस अधीक्षक को सौंप दी गई है और जांच के बाद कार्रवाई तय मानी जा रही है।

“दिल ऐसे फेंकते थे जैसे मैदान में क्रिकेट बॉल”

सीसीटीएनएस शाखा में कार्यरत कई महिला सिपाहियों का आरोप है कि आईटी प्रोग्रामर की नजर हमेशा महिला कर्मियों पर रहती थी। विभाग के अंदर चर्चा है कि जो महिला कर्मी उनकी “बात” नहीं मानती थीं, उन्हें ट्रांसफर की धमकी दी जाती थी। कई महिला सिपाहियों ने दावा किया कि विरोध करने पर उन्हें थाने से हटाकर दूर-दराज क्षेत्रों में भेज दिया गया।

एक महिला सिपाही ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा

“अगर ऐसे लोग कुर्सी पर बैठे रहेंगे तो महिला कर्मियों के लिए नौकरी करना मुश्किल हो जाएगा।”

ऑडियो वायरल, व्हाट्सऐप चैट की भी चर्चा

अब एक कथित ऑडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें आईटी प्रोग्रामर एक महिला कर्मी  से निजी संबंध बनाने की कोशिश करते सुनाई दे रहे हैं। वायरल बातचीत में कथित तौर पर वह महिला कर्मी  से कहते हैं-

आप अकेली हैं तो मेरे डेरा पर क्यों नहीं आ जाती हैं…”

वहीं महिला सिपाही उन्हें साफ तौर पर टोकते हुए कहती सुनाई दे रही है कि“आप शादीशुदा हैं, आपको ऐसा नहीं करना चाहिए। मुझे इन सब चीजों में कोई दिलचस्पी नहीं है।”

सूत्रों की मानें तो कुछ कथित व्हाट्सऐप चैट भी सामने आए हैं, जिनकी चर्चा विभाग में जोरों पर है। हालांकि वायरल ऑडियो और चैट की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

एक साल पुरानी शिकायतें फिर चर्चा में

बताया जा रहा है कि करीब एक वर्ष पहले भी कई महिला सिपाहियों ने अनौपचारिक रूप से शिकायत की थी कि विरोध करने पर उन्हें थानों से हटाया गया। लेकिन नौकरी और विभागीय दबाव के कारण किसी ने खुलकर सामने आने की हिम्मत नहीं दिखाई।

अब सबकी नजर जांच पर

डीआईजी द्वारा संज्ञान लेने के बाद पूरे पुलिस महकमे में इस मामले की चर्चा तेज हो गई है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ बड़ा प्रशासनिक संदेश भी जा सकता है।