प्रखंड में गहराया सियासी संकट: उप प्रमुख अर्पना कुमारी के खिलाफ बागी हुए एक दर्जन सदस्य, 29 मई को ‘शक्ति परीक्षण
प्रखंड में गहराया सियासी संकट: उप प्रमुख अर्पना कुमारी के खिलाफ बागी हुए एक दर्जन सदस्य, 29 मई को ‘शक्ति परीक्षण
प्रखंड में गहराया सियासी संकट: उप प्रमुख अर्पना कुमारी के खिलाफ बागी हुए एक दर्जन सदस्य, 29 मई को ‘शक्ति परीक्षण
दस्तक 7 मिडिया, उत्तम सेनगुप्ता, दरभंगा।
प्रखंड की राजनीति में इस वक्त भारी भूचाल आया हुआ है। प्रखंड उप प्रमुख अर्पना कुमारी की कुर्सी पर संकट के बादल पूरी तरह गहरा गए हैं। आगामी 29 मई को पंचायत समिति की एक विशेष बैठक बुलाई गई है, जिसमें उप प्रमुख के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर अंतिम मतदान (फ्लोर टेस्ट) होगा। बीडीओ प्रदीप कुमार झा ने इस हाई-प्रोफाइल राजनीतिक सरगर्मी की पुष्टि कर दी है।
मामले की शुरुआत बीती 14 मई को हुई, जब प्रखंड के करीब एक दर्जन निर्वाचित पंचायत समिति सदस्यों ने एकजुट होकर प्रखंड प्रमुख को एक लिखित आवेदन सौंपा। इस आवेदन में सीधे तौर पर उप प्रमुख अर्पना कुमारी को पद से हटाने की मांग की गई थी। इस कदम के बाद से ही प्रखंड के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई थी। उप प्रमुख के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले बागी सदस्यों ने उन पर कार्यशैली को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
सदस्यों का कहना है कि उप प्रमुख जानबूझकर महत्वपूर्ण बैठकें बुलाने में देरी और टालमटोल करती हैं। योजनाओं के आवंटन में पक्षपात और वित्तीय अनियमितता बरतने के आरोप लगाए गए हैं।
बागियों का दावा है कि क्षेत्र की जनता की समस्याओं पर कोई पहल नहीं की जाती और न ही सदस्यों की आवाज सुनी जाती है। लगातार हो रही इसी प्रशासनिक और राजनीतिक उपेक्षा से तंग आकर सदस्यों ने यह सामूहिक कदम उठाया है। प्रमुख मुखी देवी से विचार विमर्श के बाद सचिव सह बीडीओ प्रदीप कुमार झा के द्वारा 29 मई को तय समय पर विशेष बैठक बुलाई गई है। इसमें सबसे पहले अविश्वास प्रस्ताव पर खुली चर्चा होगी, जिसके तुरंत बाद मत विभाजन (वोटिंग) कराया जाएगा। लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए सभी निर्वाचित सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य की गई है। इस अविश्वास प्रस्ताव के दाखिल होते ही प्रखंड का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। दोनों ही खेमों में ‘नंबर गेम’ को लेकर शह-मात का खेल शुरू हो चुका है।
एक तरफ जहां अपनी कुर्सी बचाने के लिए उप प्रमुख के समर्थक विरोधी खेमे को डैमेज कंट्रोल में जुट गया है और सदस्यों को अपने पाले में बनाए रखने की हरसंभव कोशिश कर रहा है; वहीं दूसरी तरफ विरोधी गुट भी आंकड़ों को मजबूत करने के लिए लगातार गुप्त बैठकें और जोड़-तोड़ की रणनीति बनाने में व्यस्त है। अब सबकी निगाहें 29 मई को होने वाले इस दिलचस्प शक्ति परीक्षण पर टिकी हैं कि ऊंट किस करवट बैठता है।