जर्जर चचरी पुल के सहारे जिंदगी: कुशेश्वरस्थान पूर्वी के भरडीहा गांव में विकास अब भी अधूरा
जर्जर चचरी पुल के सहारे जिंदगी: कुशेश्वरस्थान पूर्वी के भरडीहा गांव में विकास अब भी अधूरा
जर्जर चचरी पुल के सहारे जिंदगी: कुशेश्वरस्थान पूर्वी के भरडीहा गांव में विकास अब भी अधूरा
दस्तक 7मीडिया /कुशेश्वरस्थान
कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड क्षेत्र के भरडीहा गांव के ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। एक ओर सरकार गांव-गांव तक सड़क, पुल और विकास पहुंचाने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर भरडीहा गांव के लोग आज भी चंदा इकट्ठा कर बनाए गए बांस के जर्जर चचरी पुल के सहारे आवागमन करने को विवश हैं।
यह पुल गांव के लोगों के लिए जीवन रेखा बना हुआ है। स्कूली बच्चों से लेकर किसानों, महिलाओं और मरीजों तक सभी को इसी खतरनाक पुल से होकर गुजरना पड़ता है। बरसात के दिनों में स्थिति और भयावह हो जाती है, जब नदी और नाले का जलस्तर बढ़ने से पुल डगमगाने लगता है। ऐसे में हर दिन पुल पार करना किसी खतरे से कम नहीं होता।
एक-एक कदम पर मौत का खतरा
ग्रामीण राज कुमार, राम रतन सहनी, छेदी कुमार, विजय पोद्दार और पवन दास सहित दर्जनों लोगों ने बताया कि गांव को मुख्य सड़क और पंचायत मुख्यालय से जोड़ने के लिए वर्षों से स्थायी पुल निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से सिर्फ आश्वासन ही मिला है।
ग्रामीणों के अनुसार चचरी पुल की हालत इतनी खराब है कि एक समय में एक-दो लोगों का गुजरना भी जोखिम भरा होता है। कई बार लोग फिसलकर नीचे गिर चुके हैं। बाइक और साइकिल लेकर पुल पार करना तो और भी खतरनाक साबित होता है।
गांव से पश्चिम दिशा में खलासिन होकर घूमकर जाना मजबूरी बन गया है। यदि बांस के इस अस्थायी पुल की जगह स्थायी पुल का निर्माण हो जाए तो गांव का सीधा संपर्क पंचायत मुख्यालय से स्थापित हो जाएगा। फिलहाल स्थिति यह है कि गांव के लोगों को अपने ही एक वार्ड से दूसरे वार्ड जाने के लिए इस जर्जर पुल का सहारा लेना पड़ता है।
बरसात में बढ़ जाती है परेशानी
ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के मौसम में सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को होती है। रात के समय पुल पार करना जान जोखिम में डालने जैसा होता है। इसके बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
किसानों का कहना है कि पुल की बदहाल स्थिति का असर खेती-किसानी पर भी पड़ रहा है। बाजार तक अनाज और सब्जियां पहुंचाने में भारी कठिनाई होती है। वहीं मरीजों को अस्पताल ले जाने में भी काफी परेशानी झेलनी पड़ती है।
“वोट के समय वादा, चुनाव बाद भूल जाते हैं नेता”
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि गांव में आकर पुल निर्माण का वादा करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही गांव की समस्या को भूल जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह पुल राजनीतिक उपेक्षा का शिकार बन चुका है।
ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रखंड क्षेत्र के अन्य इलाकों में पुल-पुलिया का निर्माण हो चुका है, लेकिन भरडीहा गांव आज भी उपेक्षित है। गांव की लगभग 1500 से 1800 की आबादी वर्षों से इस समस्या को झेल रही है।
ग्रामीणों ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि गांव के लोगों का वोट नहीं होता तो क्या सांसद और विधायक चुनाव जीत पाते? बावजूद इसके जनप्रतिनिधि जीतने के बाद गांव की सुध तक नहीं लेते।
वोट बहिष्कार के बाद बना विद्यालय, लेकिन पुल अब भी अधूरा
ग्रामीणों ने बताया कि पिछले लोकसभा चुनाव में गांव के लोगों ने “पुल और विद्यालय नहीं तो वोट नहीं” का नारा देते हुए मतदान बहिष्कार किया था। इसके बाद तत्कालीन बीडीओ किशोर कुमार के प्रयास से गांव में एक कमरे वाले विद्यालय का निर्माण कराया गया, लेकिन पुल निर्माण की दिशा में अब तक कोई कार्य नहीं हुआ। इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
हादसों में जा चुकी है जान
ग्रामीणों ने बताया कि जर्जर पुल के कारण कई हादसे हो चुके हैं। गांव के उदगार यादव बाइक से दूध लेकर लौट रहे थे, तभी पुल से नीचे गिर गए। गंभीर रूप से घायल होने के बाद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
इसके अलावा कई बाइक सवार, साइकिल चालक और पैदल राहगीर भी पुल से गिरकर घायल हो चुके हैं। बावजूद इसके प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की संवेदनहीनता पर ग्रामीणों में गहरा रोष है।
सांसद से संपर्क नहीं, विधायक ने दिया आश्वासन
इस संबंध में जब शांभवी चौधरी से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। बाद में उनके पीए सात्विक से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि सांसद बिहार से बाहर हैं और समस्या को व्हाट्सएप पर भेजने को कहा।
वहीं अतिरेक कुमार ने कहा कि पुल निर्माण को लेकर पहल की गई है। संबंधित विभाग को पत्र लिखा गया है और जवाब आने के बाद सर्वे कराकर जल्द निर्माण कार्य शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा।
आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द स्थायी पुल निर्माण कराने की मांग की है ताकि लोगों को जान जोखिम में डालकर आवागमन न करना पड़े। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे।