मिथिला क्षेत्र के डीआईजीके निर्देश पर मधुबनी जिला के एसपी की बड़ी कारवाई :अहम केस में बड़ी लापरवाही को लेकर मधुबनी जिला के पुलिस एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं एससी/एसटी के  थानाध्यक्ष रविन्द्र राम को किया निलंबित

 दस्तक 7मीडिया ,दरभंगा/संजय कुमार राय 

 बिहार पुलिस में विभागीय लापरवाही को लेकर एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। मधुबनी जिले के एससी/एसटी थाना के थानाध्यक्ष एवं पुलिस एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष पु०नि० रविन्द्र राम को गंभीर अनुसंधानात्मक लापरवाही के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। खास बात यह है कि महज 15 दिन पहले ही उन्होंने मधुबनी पुलिस एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष पद का चुनाव जीता था।

मिली जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई भागलपुर जिले के कोतवाली एवं आदमपुर थाना कांड संख्या 758/17 और 759/17 की समीक्षा के दौरान सामने आई गंभीर अनियमितताओं के आधार पर की गई है। मामले की जांच अपराध अनुसंधान विभाग (CID) एवं मिथिला क्षेत्र, दरभंगा के पुलिस उप-महानिरीक्षक स्तर पर की जा रही थी।

जांच में यह तथ्य उजागर हुआ कि 27 सितंबर 2023 को भागलपुर समाहरणालय स्थापना शाखा से संबंधित कांडों से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य  जिनमें सीडी, पेन ड्राइव और जांच प्रतिवेदन की सत्यापित प्रतियां शामिल थीं — प्राप्त की गई थीं। लेकिन बाद में जब अनुसंधान का प्रभार दूसरे अधिकारी को सौंपा गया, तब ये अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराए गए।

सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान अनुसंधानकर्ता ने कई बार आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। वहीं अपराध अनुसंधान विभाग, पटना द्वारा भी लगातार पत्राचार किया गया, बावजूद इसके संबंधित अधिकारी द्वारा डिजिटल साक्ष्य जमा नहीं किए गए। इससे अनुसंधान कार्य प्रभावित हुआ और केस की प्रगति पर प्रतिकूल असर पड़ा।

विभागीय समीक्षा में इसे गंभीर कर्तव्यहीनता और अनुसंधान में लापरवाही मानते हुए पुलिस मुख्यालय ने सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया। इसके बाद मधुबनी एसपी ने पु०नि० रविन्द्र राम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय पुलिस केंद्र, मधुबनी निर्धारित किया गया है तथा उन्हें केवल सामान्य जीवन यापन भत्ता मिलेगा।

पुलिस विभाग की इस कार्रवाई को प्रशासनिक जवाबदेही और अनुसंधान प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि अब जांच से जुड़े दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के रख-रखाव में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।