“जिंदा महिला को कोर्ट में ‘मृत’ बता दिया गया, हाईकोर्ट सख्त के बाद एसपी ने थानाध्यक्ष को कर दिया था सस्पेंड, बहाल हुई अपील”पटना हाईकोर्ट में बड़ी लापरवाही हुई थी उजागर, पुलिस रिपोर्ट की गलती से खत्म हो गई थी महिला की अपील
“जिंदा महिला को कोर्ट में ‘मृत’ बता दिया गया, हाईकोर्ट सख्त के बाद एसपी ने थानाध्यक्ष को कर दिया था सस्पेंड, बहाल हुई अपील”पटना हाईकोर्ट में बड़ी लापरवाही हुई थी उजागर, पुलिस रिपोर्ट की गलती से खत्म हो गई थी महिला की अपील
“जिंदा महिला को कोर्ट में ‘मृत’ बता दिया गया, हाईकोर्ट सख्त के बाद एसपी ने थानाध्यक्ष को कर दिया था सस्पेंड, बहाल हुई अपील”पटना हाईकोर्ट में बड़ी लापरवाही हुई थी उजागर, पुलिस रिपोर्ट की गलती से खत्म हो गई थी महिला की अपील
दस्तक 7 मीडिया/संजय कुमार राय
उच्च न्यायालय में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया था , जहां पुलिस की गलत रिपोर्ट के आधार पर एक जीवित महिला को मृत मान लिया गया और उसकी आपराधिक अपील तक समाप्त कर दी गई। बाद में जब महिला खुद कोर्ट पहुंची और अपने जीवित होने के प्रमाण दिए, तब पूरी व्यवस्था की बड़ी चूक उजागर हुई। इसके बाद लापरवाही के आरोप में ताजपुर थानाध्यक्ष को एसपी ने निलंबित भी कर दिया था ।
मामला क्रिमिनल मिसलेनियस संख्या 33059/2026 तथा क्रिमिनल अपील (DB) संख्या 377/2015 से जुड़ा है। याचिकाकर्ता सकली देवी, पत्नी स्वर्गीय बाल गोविंद सादा, निवासी मोरबा आनंदपुर, थाना ताजपुर, जिला समस्तीपुर हैं।
कैसे हुई पूरी गड़बड़ी
दरअसल, समस्तीपुर पुलिस की ओर से हाईकोर्ट को रिपोर्ट भेजी गई थी कि अपीलकर्ता सकली देवी की मृत्यु हो चुकी है। इस रिपोर्ट के आधार पर 13 मार्च 2026 को हाईकोर्ट ने अपील को “उपशमित” मानते हुए समाप्त कर दिया।
लेकिन बाद में सकली देवी खुद अदालत पहुंचीं और बताया कि वह पूरी तरह जीवित हैं। उन्होंने आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक और मुखिया द्वारा जारी जीवित प्रमाण पत्र कोर्ट में प्रस्तुत किया। इसके बाद पूरे मामले की दोबारा जांच हुई तो पता चला कि पुलिस ने “सकली देवी” नाम की दूसरी महिला की मृत्यु रिपोर्ट भेज दी थी।
असल अपीलकर्ता “सकली देवी पत्नी स्व. बाल गोविंद सादा” थीं, जबकि पुलिस ने “सकली देवी पत्नी धनराज पासवान” को मृत बताते हुए रिपोर्ट भेज दी थी। नाम एक होने के कारण यह गंभीर भ्रम पैदा हुआ।
एसपी और थानाध्यक्ष ने मानी गलती
मामले की गंभीरता को देखते हुए समस्तीपुर के पुलिस अधीक्षक अरविंद प्रताप सिंह और ताजपुर थानाध्यक्ष राकेश कुमार शर्मा को कोर्ट के समक्ष पेश होना पड़ा। दोनों अधिकारियों ने शपथ पत्र दाखिल कर बिना शर्त माफी मांगी।
पुलिस अधीक्षक ने कोर्ट को बताया कि रिपोर्ट तैयार करने में तथ्यात्मक त्रुटि हुई थी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में किसी भी अपीलकर्ता की कुशल-क्षेम रिपोर्ट भेजते समय पूरा नाम, पता और पारिवारिक विवरण का सत्यापन किया जाएगा।
थानाध्यक्ष हुए थे निलंबित , फिर होंगे बहाल
इस गंभीर लापरवाही के बाद ताजपुर थाना प्रभारी राकेश कुमार शर्मा को 10 मई 2026 को निलंबित कर दिया गया।
हाईकोर्ट ने क्या कहा
माननीय मुख्य न्यायाधीश एवं न्यायमूर्ति हरीश कुमार की खंडपीठ ने पुलिस अधीक्षक की बिना शर्त माफी स्वीकार करते हुए 13 मार्च 2026 का पुराना आदेश वापस ले लिया और आपराधिक अपील संख्या 377/2015 को पुनः मूल फाइल पर बहाल कर दिया।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी लापरवाही न्यायिक प्रक्रिया को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।
मामले ने उठाए कई सवाल
यह मामला पुलिस सत्यापन प्रक्रिया और न्यायिक रिकॉर्ड प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि सकली देवी खुद कोर्ट नहीं पहुंचतीं, तो एक जीवित महिला की अपील हमेशा के लिए समाप्त मानी जाती।