विशेष रिपोर्ट:जिले में पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) का पद महीनों से रिक्त,अति संवेदनशील’ क्षेत्रों की श्रेणी में आते हैं यह क्षेत्र
विशेष रिपोर्ट:जिले में पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) का पद महीनों से रिक्त,अति संवेदनशील’ क्षेत्रों की श्रेणी में आते हैं यह क्षेत्र
विशेष रिपोर्ट:जिले में पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) का पद महीनों से रिक्त,अति संवेदनशील’ क्षेत्रों की श्रेणी में आते हैं यह क्षेत्र
दस्तक 7 मिडिया, बिरौल,दरभंगा।
बिहार सरकार एक तरफ राज्य की कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए नए पुलिस पदों का सृजन कर रही है, वहीं दूसरी ओर मिथिलांचल के केंद्र ‘दरभंगा’ की अनदेखी सुरक्षा तंत्र की संवेदनशीलता पर प्रश्नचिह्न लगा रही है। जिले में पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) का पद महीनों से रिक्त पड़ा है, जिससे ग्रामीण इलाकों की मॉनिटरिंग और अपराध नियंत्रण की रफ्तार सुस्त पड़ती दिख रही है।
दरभंगा जिला भौगोलिक और सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। विशेषकर बिरौल और बेनीपुर जैसे अनुमंडल ‘अति संवेदनशील’ क्षेत्रों की श्रेणी में आते हैं। इन क्षेत्रों की जटिलताओं को देखते हुए यहां एक पूर्णकालिक ग्रामीण पुलिस अधीक्षक की उपस्थिति अनिवार्य है। बावजूद इसके, सरकार और विभाग इस पद पर किसी अधिकारी की नियुक्ति करने में तत्परता नहीं दिखा रहे हैं। मालूम हो कि दरभंगा ग्रामीण एसपी के पद पर काम्या मिश्रा जैसी तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी ने अपनी सेवाएं दी थीं, जिनके कार्यकाल में पुलिसिंग में एक नई ऊर्जा देखी गई थी। उनके बाद आलोक कुमार ने कमान संभाली, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद से यह कुर्सी खाली है। क्षेत्र के प्रबुद्ध लोगों का कहना है कि एक तरफ नई नियुक्तियों और पद सृजन किया जा रहा है, और दूसरी तरफ दरभंगा जैसे बड़े जिले में पिछले अधिकारियों के जाने के बाद ‘वैक्यूम’ (शून्यता) की स्थिति बनी हुई है।
जब बिरौल और बेनीपुर जैसे इलाके संवेदनशील हैं, तो यहां नेतृत्व की कमी क्यों रखी गई है?
कैबिनेट द्वारा नए पदों के सृजन के बीच पुराने और स्वीकृत पदों को खाली रखना कैसी रणनीति है?दरभंगा की जनता और यहां की सुरक्षा व्यवस्था को एक ‘फुल-टाइम’ तेजतर्रार ग्रामीण एसपी की सख्त जरूरत है।