दरभंगा में LPG आपूर्ति व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, बेंता स्थित इंजीनियर गैस सर्विस पर उपभोक्ताओं का फूटा गुस्सा, जिला प्रशासन का दावा टांय – टांय फिसस ??

दस्तक 7 मीडिया /दरभंगा 

दरभंगा में रसोई गैस की किल्लत अब आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है। जिले की कई गैस एजेंसियों पर उपभोक्ताओं ने मनमानी, कालाबाजारी और फर्जी डिलीवरी मैसेज भेजने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। सबसे ज्यादा शिकायतें लहेरियासराय के बेंता स्थित इंजीनियर  गैस एजेंसी(सर्विस )को लेकर सामने आ रही हैं, जहां हर दिन उपभोक्ताओं की भारी भीड़ देखी जा रही है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि गैस एजेंसी की ओर से होम डिलीवरी व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। उपभोक्ताओं को पहले ऑनलाइन भुगतान करवाया जाता है, फिर DAC नंबर जारी किया जाता है, लेकिन कई-कई सप्ताह बीत जाने के बाद भी सिलेंडर घर तक नहीं पहुंचता। आरोप यह भी है कि एजेंसी की ओर से पहले “डिलीवरी होने वाला है” का मैसेज भेजा जाता है और बाद में बुकिंग कैंसिल कर दी जाती है।

उपभोक्ताओं का कहना है कि जिले के प्रभावशाली और रसूखदार लोगों को बिना किसी परेशानी के गैस सिलेंडर उपलब्ध करा दिए जाते हैं, जबकि आम लोग 40 से 50 दिनों तक इंतजार करने को मजबूर हैं। कई परिवारों के घरों में चूल्हा तक बंद होने की नौबत आ गई है।

सूत्रों के अनुसार, होम डिलीवरी के नाम पर बड़ा खेल चल रहा है। आरोप है कि गैस वेंडरों को अतिरिक्त सिलेंडर दिए जाते हैं, जिन्हें खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता है। बताया जा रहा है कि कुछ वेंडर एजेंसी से करीब 1300 रुपये में सिलेंडर लेकर 1600 से 1700 रुपये तक में बेच रहे हैं। ऐसे में नियमित उपभोक्ताओं तक गैस पहुंच ही नहीं पा रही है।

स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि सुबह 5 बजे से ही एजेंसी के बाहर लंबी कतारें लग जाती हैं। घंटों लाइन में लगने के बावजूद कई उपभोक्ताओं को खाली हाथ लौटना पड़ता है। इसी बीच ढोकली पंचायत के एक युवक की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई, जो लाइन में लगकर गैस लेने जा रहा था। इस घटना के बाद लोगों में आक्रोश और बढ़ गया है।

बलभद्रपुर निवासी संजीव कुमार मिश्रा सहित कई उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि एजेंसी में खुलेआम कालाबाजारी हो रही है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन केवल प्रेस नोट जारी कर छापेमारी और आपूर्ति सुधार के दावे करता है, जबकि जमीनी स्थिति बिल्कुल अलग है।

उपभोक्ता संजय कुमार राय का मामला भी व्यवस्था की पोल खोलता नजर आता है। उन्होंने 21 अप्रैल 2026 को 1001 रुपये का ऑनलाइन भुगतान किया। 28 अप्रैल को एजेंसी की ओर से मैसेज आया कि एक सप्ताह के भीतर डिलीवरी हो जाएगी। बाद में 7 मई को DAC नंबर जारी किया गया, लेकिन 12 मई तक भी गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं कराया गया। यानी करीब 48 दिन बीत जाने के बावजूद उपभोक्ता को गैस नहीं मिल सकी।

लोगों का आरोप है कि जिला आपूर्ति विभाग प्रतिदिन हजारों सिलेंडर वितरण के आंकड़े जारी कर आम जनता को गुमराह कर रहा है। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि बंगाली टोला, बलभद्रपुर समेत कई मोहल्लों के लोग गैस के लिए परेशान हैं। बंगाली टोला के कस्टमर नम्बर7240145948 की बात करे तो इंजीनियर गैस सर्विस का कनेक्शन हे और करीब 48 दिनों के बाद यहां गेस की आपूर्ति हुई लेकिन गेस तौलने पर इन्हें 27.7किलो गेस सिलेंडर में प्राप्त हुआ जबकि सिलेंडर पर 29.7 किलो वजन लिखा हुआ हे यानी दो किलो गेस कम?? इसका जिम्मेदार कौन? ऐसी कई बाते हैं जिसका जांच आवश्यक हे ताकि उपभोक्ताओं के साथ कोई धोखाधरी नहीं हो ?

अब उपभोक्ताओं की मांग है कि जिला प्रशासन बेंता स्थित इंजीनियर गैस एजेंसी (सर्विस )की निष्पक्ष जांच कराए, कालाबाजारी में शामिल लोगों पर कठोर कार्रवाई करे और जनता को पारदर्शी तरीके से बताए कि अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।