न्यायालय में मासूम की पुकार “पापा मारते हैं, मुझे मां के पास जाना है, 

दस्तक 7 मिडिया, उत्तम सेनगुप्ता, दरभंगा। 

रिश्तों की कड़वाहट और पारिवारिक बिखराव के बीच फंसी एक पांच वर्षीय मासूम की गुहार ने सोमवार को न्यायालय के माहौल को भावुक कर दिया। बिरौल थाना क्षेत्र के सिसौनी, गोविंदपुर गांव की रहने वाली नन्ही सुचिता ने भरी अदालत में जज के सामने स्पष्ट किया कि वह अपने पिता के साथ नहीं, बल्कि अपनी मां के साथ रहना चाहती है। बच्ची के इस बयान के बाद न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने उसे उसकी मां को सौंप दिया गया है।

यह कहानी किसी फिल्म की पटकथा नहीं, बल्कि एक कड़वी हकीकत है। रूचिता का परिवार कभी खुशहाल था, लेकिन आपसी विवाद के चलते उसकी मां अपने छोटे बच्चे को लेकर घर छोड़ने पर मजबूर हो गई। रूचिता अपने पिता और दादी के पास ही रह गई थी। बीती 3 मई 2026 को रूचिता रहस्यमयी परिस्थितियों में अपने घर से गायब हो गई थी। काफी खोजबीन के बाद जब वह नहीं मिली, तो उसकी दादी फूलदार देवी ने अपने ही रिश्तेदार कृष्णा मंडल के खिलाफ थाने में नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई।

थानाध्यक्ष चन्द्रमणि ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी कमान महिला सब-इंस्पेक्टर मुन्नी कुमारी को सौंपी। मुन्नी कुमारी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मनोवैज्ञानिक दबाव और तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लिया। पुलिसिया दबाव के आगे झुकते हुए आरोपियों ने बच्ची को 10 मई को बिरौल लाकर छोड़ दिया। जहां पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया।

11 मई को जब अनुसंधानकर्ता मुन्नी कुमारी ने बच्ची को न्यायालय में पेश किया, तो वहां मौजूद हर शख्स दंग रह गया। जब न्यायाधीश ने रूचिता से उसकी इच्छा पूछी, तो उसने बिना डरे कहा,

पिताजी काफी मारपीट करते हैं, मैं उनके पास नहीं रहना चाहती। मुझे मेरी मां के पास जाना है।

एक पांच साल की बच्ची के मुंह से निकले इन शब्दों ने घरेलू हिंसा के उस दर्द को बयां कर दिया जिसे वह लंबे समय से सह रही थी। माननीय न्यायालय ने बच्ची की सुरक्षा और उसकी इच्छा को सर्वोपरि रखते हुए उसे तत्काल उसकी मां को सौंपने का निर्देश दिया। एस आई मुन्नी कुमारी ने कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रूचिता को उसकी मां अर्चना की गोद में बहाल कर दिया। इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन और पुलिस की मानवीय कार्यशैली की क्षेत्र में काफी प्रशंसा हो रही है।