प्रमुख मुखी देवी की कुर्सी बरकरार, कौरम के अभाव में अविश्वास प्रस्ताव ध्वस्त,उपस्थित नहीं हुए उप प्रमुख,
प्रमुख मुखी देवी की कुर्सी बरकरार, कौरम के अभाव में अविश्वास प्रस्ताव ध्वस्त,उपस्थित नहीं हुए उप प्रमुख,
प्रमुख मुखी देवी की कुर्सी बरकरार, कौरम के अभाव में अविश्वास प्रस्ताव ध्वस्त,उपस्थित नहीं हुए उप प्रमुख ।
दस्तक 7 मिडिया, बिरौल, दरभंगा।
बिरौल प्रखंड की राजनीति में पिछले कई दिनों से जारी घमासान पर सोमवार को विराम लग गया। प्रमुख मुखी देवी के विरुद्ध असंतुष्ट सदस्यों द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव कौरम के अभाव में खारिज हो गया। विशेष बैठक के लिए निर्धारित समय और प्रक्रिया के बावजूद विपक्षी खेमा आवश्यक संख्या बल जुटाने में विफल रहा, जिसके चलते मुखी देवी की कुर्सी सुरक्षित रह गई है।
प्रखंड मुख्यालय स्थित सभागार में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए सुबह 11:30 बजे का समय निर्धारित था। पर्यवेक्षक के रूप में डीएसएलआर श्रीमती मयंक सिंह मौजूद थे। नियमत बैठक शुरू हुई, लेकिन ढाई घंटे के लंबे इंतजार के बाद भी सदन में केवल 12 पंचायत समिति सदस्य ही उपस्थित हो सके। प्रस्ताव को पारित करने या चर्चा को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत (कोरम) पूरा नहीं होने के कारण पर्यवेक्षक ने बैठक को स्थगित करते हुए अविश्वास प्रस्ताव को खारिज करने की घोषणा कर दी। बैठक में पहुंचे पंचायत समिति सदस्य व पूर्व प्रमुख रुखसाना परवीन,बिहारी ठाकुर,अझर हुसैन,मो. शफीक सहित अन्य सदस्यों ने इस पूरी प्रक्रिया पर कड़ा रोष जताया। सदन में मौजूद सदस्यों ने आरोप लगाया कि उप-प्रमुख का बैठक से नदारद रहना नियम विरुद्ध है। सदस्यों का आरोप है कि प्रमुख के विरुद्ध लाया गया अविश्वास प्रस्ताव में बीडीओ की भुमिका संदेहास्पद था। विरोधी गुट ने आरोप लगाया कि सोची-समझी साजिश के तहत अन्य सदस्यों को बैठक में आने से रोका गया और उन्हें डराया-धमकाया गया ताकि संख्या बल प्रदर्शित न हो सके। सदस्यों ने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतंत्र की हत्या करार दिया।
बता दें कि लगभग एक दर्जन पंचायत समिति सदस्यों ने प्रमुख मुखी देवी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन पर कई गंभीर आरोप लगाए थे, जिनमें मुख्य रूप से विकास योजनाओं के चयन में मनमानी और अनियमितता,नियमित बैठकें न बुलाना और सदस्यों की उपेक्षा करना,योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता का अभाव मुख्य था। प्रखंड विकास पदाधिकारी सह कार्यपालक पदाधिकारी प्रदीप कुमार झा ने स्पष्ट किया कि पंचायती राज अधिनियम के तहत यदि निर्धारित बैठक में आवश्यक कौरम पूरा नहीं होता है, तो अविश्वास प्रस्ताव स्वतः ही निष्प्रभावी और खारिज माना जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत वर्तमान प्रमुख अपने पद पर बनी रहेंगी। प्रस्ताव खारिज होने के बाद प्रमुख गुट के समर्थकों में खुशी की लहर है, वहीं बिरौल की राजनीति में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। जानकारों का मानना है कि भले ही मुखी देवी की कुर्सी बच गई हो, लेकिन विपक्षी सदस्यों के कड़े तेवर आने वाले समय में सदन की कार्यवाही और विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं।