संस्कृत और तकनीक का संगम: एलएनएमयू में ‘संस्कृत भाषा एवं कंप्यूटर’ पर राष्ट्रीय वेबीनार
संस्कृत और तकनीक का संगम: एलएनएमयू में ‘संस्कृत भाषा एवं कंप्यूटर’ पर राष्ट्रीय वेबीनार
संस्कृत और तकनीक का संगम: एलएनएमयू में ‘संस्कृत भाषा एवं कंप्यूटर’ पर राष्ट्रीय वेबीनार
दस्तक 7 मीडिया /दरभंगा
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग द्वारा “संस्कृत भाषा एवं कंप्यूटर” विषय पर राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन किया गया। वेबीनार में देश-विदेश के 60 से अधिक शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने ऑनलाइन सहभागिता की। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ कृष्णकांत झा ने की।
वेबीनार में जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय के तुलनात्मक धर्म एवं सभ्यता केंद्र के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ विकास सिंह मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि संस्कृत की संरचना अत्यंत वैज्ञानिक है और पाणिनि की ‘अष्टाध्यायी’ में वर्णित लगभग चार हजार सूत्र कंप्यूटर विज्ञान के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा की तार्किकता और संरचनात्मक स्पष्टता कंप्यूटर साइंस के अनुरूप है। यदि कंप्यूटर तकनीक के माध्यम से संस्कृत के ज्ञान-विज्ञान का संरक्षण किया जाए तो भारत की प्राचीन ज्ञान-परंपरा सुरक्षित होने के साथ वैश्विक स्तर पर और विस्तृत होगी।
डॉ विकास सिंह ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में संस्कृत एवं कंप्यूटर के बढ़ते महत्व की चर्चा करते हुए कहा कि आज पूरे विश्व में संस्कृत और कंप्यूटर को लेकर गंभीर विमर्श चल रहा है। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक संस्कृत साहित्य को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।
विषय प्रवेश कराते हुए संस्कृत प्राध्यापक डॉ आर एन चौरसिया ने कहा कि संस्कृत और कंप्यूटर का संबंध अत्यंत गहरा है। संस्कृत की व्याकरणिक संरचना इतनी स्पष्ट, तार्किक और व्यवस्थित है कि यह कंप्यूटर एल्गोरिद्म से काफी हद तक मेल खाती है। उन्होंने कहा कि संस्कृत साहित्य का डिजिटलीकरण भविष्य में ज्ञान-संरक्षण का बड़ा आधार बनेगा। संस्कृत केवल प्राचीन ज्ञान की भाषा नहीं, बल्कि आधुनिक विज्ञान और तकनीक के युग में भी उपयोगी सिद्ध हो रही है।
अध्यक्षीय संबोधन में डॉ कृष्णकांत झा ने कहा कि संस्कृत-ज्ञान की मूल आधारशिला आज भी गुरु-शिष्य परंपरा ही है। हालांकि कंप्यूटर और डिजिटल माध्यम संस्कृत के प्रचार-प्रसार को देश-विदेश तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कार्यक्रम की संयोजिका डॉ ममता स्नेही ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि डॉ मोना शर्मा ने संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन किया। वेबीनार का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
वेबीनार में थाईलैंड से भंते आनिंदा, दिल्ली विश्वविद्यालय से ओंकारनाथ, जम्मू-कश्मीर से डॉ संतोष कुमार, भागलपुर विश्वविद्यालय से डॉ रामायण सिंह, जेएनयू दिल्ली से प्रेरणा नारायण, सीतामढ़ी से आशीष रंजन, पश्चिम बंगाल से नजमा हसन सहित कई विद्वानों ने सहभागिता की।
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