पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन ही वास्तविक आज़ादी का प्रतीक– इं.आरके जायसवाल

दस्तक 7 मिडिया, नई दिल्ली।

हालिया पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की शर्मनाक हार एवं भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि लोकतंत्र की वास्तविक विजय है। पहली बार पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार का गठन होना लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनर्स्थापना के रूप में देखा जा रहा है।भारतीय जनसंघ के संस्थापक एवं प्रखर राष्ट्रवादी नेता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की धरती पर वर्षों बाद लोकतंत्र की सशक्त सरकार बनने से राष्ट्रवादी विचारधारा को नई ऊर्जा मिली है।

ज्ञातव्य है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान विभिन्न आंकड़ों के अनुसार लगभग 300 भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या की घटनाएं सामने आईं, जो राजनीतिक हिंसा एवं भय के वातावरण को दर्शाती हैं। आरोप यह भी रहे कि चुनावों के दौरान अन्य दलों के मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक पहुंचने से रोकने के लिए टीएमसी समर्थकों द्वारा विभिन्न हथकंडे अपनाए जाते रहें हैं। वर्ष 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान भी लगभग 57 लोगों की हत्याएं की घटनाएं सामने आई थीं। वहीं, वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग द्वारा अपेक्षाकृत बेहतर एवं सख्त व्यवस्था किए जाने के परिणामस्वरूप लगभग 93 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो लोकतंत्र में जनता की आस्था का प्रतीक माना जा रहा है। इसके बावजूद, वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी कई स्थानों पर अनियमितताओं एवं दबाव की शिकायतें सामने आईं। आरोप हैं कि कुछ स्थानों पर विपक्षी दलों के समर्थकों एवं ईवीएम मशीनों तक को नुकसान पहुंचाने अथवा ईवीएम मशीन पर भाजपा के चुनाव चिह्न पर टेप लगाकर मतदाताओं को बाधित करने के प्रयास किए गए। पश्चिम बंगाल की जनता ने इस चुनाव के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया है कि लोकतंत्र में भय, हिंसा और दबाव की राजनीति नहीं, बल्कि जनमत सर्वोपरि होता है। अब पश्चिम बंगाल की जनता को सभी मतभेद भुलाकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए, ताकि देशविरोधी ताकतों को करारा जवाब दिया जा सके।