बिहार में सत्ता का नया समीकरण: सम्राट मंत्रिमंडल में जातीय-सामाजिक संतुलन का बड़ा दांव, जदयू-भाजपा ने साधे कई समीकरण
बिहार में सत्ता का नया समीकरण: सम्राट मंत्रिमंडल में जातीय-सामाजिक संतुलन का बड़ा दांव, जदयू-भाजपा ने साधे कई समीकरण
बिहार में सत्ता का नया समीकरण: सम्राट मंत्रिमंडल में जातीय-सामाजिक संतुलन का बड़ा दांव, जदयू-भाजपा ने साधे कई समीकरण
दस्तक 7 मीडिया, पटना /
बिहार की राजनीति में नई हलचल के बीच सम्राट मंत्रिमंडल का विस्तार सत्ता और संगठन दोनों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। आगामी चुनावी चुनौती और बदलते राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए एनडीए ने मंत्रिमंडल में सामाजिक संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश की है। मंत्रिमंडल में जदयू, भाजपा, लोजपा (रामविलास), हम और आरएलएम को प्रतिनिधित्व दिया गया है।
सबसे ज्यादा चर्चा भाजपा और जदयू के बीच मंत्रालयों के संतुलन तथा नए चेहरों की एंट्री को लेकर हो रही है। कई पुराने चेहरों पर भरोसा जताया गया है, वहीं कुछ नए नामों को शामिल कर स्पष्ट संकेत दे दिया गया है ।
जदयू कोटे से ये चेहरे बने मंत्री
जदयू की ओर से श्रवण कुमार, अशोक चौधरी, मदन सहनी, सुनील कुमार, जमा खान, निशांत कुमार, श्वेता गुप्ता, बुलो मंडल, लेसी सिंह, भगवान सिंह कुशवाहा, रत्नेश सदा, शीला मंडल और दामोदर रावत को मंत्रिमंडल में जगह मिली है।
जदयू ने इस सूची के जरिए अति पिछड़ा, दलित, महादलित, अल्पसंख्यक और महिला वोट बैंक को साधने की रणनीति दिखाई है। जमा खान के जरिए मुस्लिम प्रतिनिधित्व, जबकि रत्नेश सदा और शीला मंडल जैसे नामों के जरिए महादलित वर्ग को संदेश देने की कोशिश मानी जा रही है। लेसी सिंह और श्वेता गुप्ता को शामिल कर महिला भागीदारी पर भी जोर दिया गया है।
भाजपा ने अनुभवी और नए चेहरों पर खेला दांव
भाजपा कोटे से विजय सिन्हा, रामकृपाल यादव, केदार गुप्ता, रमा निषाद, नीतीश मिश्रा, दिलीप जायसवाल, श्रेयसी सिंह, प्रमोद चंद्रवंशी, लखेंद्र पासवान, संजय टाइगर, अरुण शंकर प्रसाद, नंदकिशोर राम, मिथिलेश तिवारी, इंजीनियर शैलेंद्र और रामचंद्र प्रसाद को मंत्री बनाया गया है।
भाजपा ने इस बार पिछड़ा, अति पिछड़ा, सवर्ण और दलित वर्ग के बीच संतुलन साधने का प्रयास किया है। श्रेयसी सिंह को शामिल कर युवा और महिला चेहरे को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया है, जबकि रामकृपाल यादव और विजय सिन्हा जैसे नेताओं पर भरोसा कायम रखा गया है। मिथिला क्षेत्र से नीतीश मिश्रा और मिथिलेश तिवारी जैसे नेताओं को तवज्जो देकर भाजपा ने उत्तर बिहार पर विशेष फोकस का संकेत दिया है।
सहयोगी दलों को भी मिला प्रतिनिधित्व
एनडीए के सहयोगी दलों को भी मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी दी गई है। लोजपा (रामविलास) से संजय पासवान और संजय सिंह को मंत्री बनाया गया है। वहीं हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) से संतोष सुमन को जगह मिली है। आरएलएम से दीपक प्रकाश को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सहयोगी दलों को प्रतिनिधित्व देकर एनडीए ने गठबंधन एकजुटता का स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है।
चुनावी संदेश साफ: हर वर्ग तक पहुंचने की तैयारी
सम्राट मंत्रिमंडल की नई टीम को देखकर साफ माना जा रहा है कि एनडीए ने बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर सामाजिक इंजीनियरिंग का पूरा खाका तैयार किया है। मंत्रिमंडल में युवाओं, महिलाओं, पिछड़ों, दलितों, महादलितों और क्षेत्रीय नेताओं को संतुलित तरीके से जगह देकर सत्ता पक्ष ने व्यापक राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है।अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि विभागों का बंटवारा किसे कितना राजनीतिक वजन देता है और नई टीम सरकार के प्रदर्शन को किस दिशा में लेकर जाती है।