बाबा कुशेश्वरनाथ मंदिर में अब नहीं बनेंगी रील्स, शोर-शराबे और मुख्य द्वार पर वाहन पूजा पर भी लगा प्रतिबंध
बाबा कुशेश्वरनाथ मंदिर में अब नहीं बनेंगी रील्स, शोर-शराबे और मुख्य द्वार पर वाहन पूजा पर भी लगा प्रतिबंध
बाबा कुशेश्वरनाथ मंदिर में अब नहीं बनेंगी रील्स, शोर-शराबे और मुख्य द्वार पर वाहन पूजा पर भी लगा प्रतिबंध
दस्तक 7 मिडिया, उत्तम सेनगुप्ता, दरभंगा।
बाबा कुशेश्वरनाथ महादेव मंदिर की पवित्रता और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया है। शशांक राज,अनुमंडल पदाधिकारी, बिरौल सह अध्यक्ष, बाबा कुशेश्वरनाथ महादेव मंदिर न्यास समिति ने एक आधिकारिक आदेश जारी कर मंदिर परिसर में रील्स बनाने, बिना अनुमति लाउडस्पीकर बजाने और मुख्य द्वार पर वाहनों की पूजा करने पर पूर्णतः रोक लगा दी गई है।
आदेश के अनुसार, सोशल मीडिया के माध्यम से यह जानकारी मिली थी कि कुछ लोग मंदिर प्रांगण में रील्स बनाकर उसे वायरल कर रहे हैं, जो धार्मिक आस्था के प्रतिकूल है। इसके अलावा, बिना किसी सक्षम अनुमति के शादी, मुंडन और अन्य कार्यक्रमों में मिनी डीजे और लाउडस्पीकर का प्रयोग किया जा रहा था, जिससे आम श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना में काफी कठिनाई हो रही थी।
श्रद्धालुओं की सहूलियत के लिए प्रशासन ने निम्नलिखित आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किए हैं, जिसमें बाबा कुशेश्वरनाथ महादेव मंदिर के प्रांगण में अब किसी भी प्रकार की रील्स नहीं बनाई जाएगी।
मंदिर परिसर में बिना अनुमति के छोटा-बड़ा कोई भी लाउडस्पीकर, बैंड-बाजा या डीजे बजाना पूरी तरह प्रतिबंधित होगा।
मंदिर के स्वयं के लाउडस्पीकर भी अब केवल निर्धारित मानक (वॉल्यूम लिमिट) के अनुसार ही बजाए जाएंगे।
मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर होने वाली वाहन पूजा को अब वहां से हटाकर पास ही स्थित स्व० गजेन्द्र नारायण सिंह धर्मशाला की खाली भूमि पर स्थानांतरित कर दिया गया है। मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार के पास वाहनों की पूजा-पाठ कराने पर अब पूर्ण रूप से प्रतिबंध रहेगा ताकि श्रद्धालुओं के आवागमन में कोई बाधा न आए। अनुमंडल पदाधिकारी सह अध्यक्ष बाबा कुशेश्वरनाथ महादेव मंदिर न्यास समिति द्वारा जारी आदेश का अनुपालन कराने के लिए थानाप्रभारी और अंचल अधिकारी कुशेश्वरस्थान पूर्वी को पत्र भेजी गई है। उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे मंदिर परिसर की सतत निगरानी रखें और इन नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
न्यास समिति का मानना है कि इन बदलावों से मंदिर के शांत और आध्यात्मिक वातावरण को बहाल करने में मदद मिलेगी और दूर-दराज से आने वाले भक्तों को सुलभ दर्शन प्राप्त होंगे।