थाने से 200 मीटर पर 2220 लीटर शराब का ‘साम्राज्य’! मब्बी पुलिस पर उठे गंभीर सवाल, दो दिन पहले मद्य निषेध टीम की छापेमारी में बड़ा खुलासा, क्या पुलिस की मिलीभगत से अब तक फल-फूल रहा था अवैध कारोबार
दस्तक 7 मीडिया /दरभंगा
मब्बी थाना क्षेत्र में मद्य निषेध विभाग की बड़ी कार्रवाई ने स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। थाना से महज 200 मीटर की दूरी पर स्थित एक गोदाम से 2220 लीटर से अधिक अवैध शराब की बरामदगी ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर चल रहे इस गोरखधंधे की भनक पुलिस को कैसे नहीं लगी?
स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा तेज है कि कहीं इस पूरे खेल में थाना पुलिस की भूमिका संदिग्ध तो नहीं? सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या मासिक ‘नजराना’ के बदले पुलिस आंख मूंदे बैठी थी?
छापेमारी में बड़ा खुलासा
सहायक आयुक्त, मद्य निषेध प्रदीप कुमार ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर गेहुमी ओवरब्रिज के समीप स्थित एक गोदाम में छापेमारी की गई। कार्रवाई के दौरान टीम ने गोदाम और एक पिकअप वाहन से कुल 2220.600 लीटर अवैध शराब जब्त की। जिसमें 1392.600 लीटर विदेशी शराब और 828 लीटर बीयर था ।मौके से 5 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया और गोदाम को सील कर दिया गया है। सभी आरोपियों पर मद्य निषेध अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की गई है।
सवालों के घेरे में गोदाम मालिक
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल गोदाम के मालिक को लेकर खड़ा हो रहा है। क्या गोदाम मालिक ही इस अवैध कारोबार का सरगना है?अगर नहीं, तो इतनी भारी मात्रा में शराब वहां कैसे पहुंची? यदि गोदाम किराये पर दिया गया था, तो किरायेदार कौन है? और सबसे अहम सवाल:गोदाम मालिक ने पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी?
‘मंथली सिस्टम’ का खेल?
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि मब्बी थाना क्षेत्र में अवैध कारोबार कोई नई बात नहीं है। बाजार समिति इलाके में अंत्योदय-अन्नपूर्णा योजना के खाद्यान्न की कालाबाजारी लंबे समय से जारी है।बताया जाता है कि कई गोदामों में गरीबों के हक का अनाज अवैध तरीके से स्टॉक कर ऊंचे दामों पर बेचा जाता है।सूत्रों के अनुसार, इन धंधों के एवज में कुछ लोगों द्वारा थाना को मासिक नजराना दिया जाता है, जिसके चलते कार्रवाई नहीं होती। यही कारण है कि शराब का अवैध भंडारण भी खुलेआम चलता रहता हे।सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस गोदाम से इतनी बड़ी मात्रा में शराब बरामद हुई, वह थाना से महज कुछ कदम की दूरी पर है। ऐसे में पुलिस की अनभिज्ञता पर सवाल उठना लाजिमी हे।मद्य निषेध विभाग की कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अगर ईमानदारी से जांच हो, तो बड़े-बड़े अवैध नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकता है। अब देखना यह है कि क्या इस मामले में सिर्फ तस्करों पर कार्रवाई होगी, या फिर पुलिस की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होगी। क्या गोदाम मालिक भी कानून के शिकंजे में आयेंगे?
मब्बी थानाध्यक्ष ने पूछने पर बताया कि उनके जानकारी में यह बात नहीं थी,यह कार्रवाई मद्य निषेध विभाग पटना की सूचना पर हुई हे।
