दरभंगा में 400–500 वर्ष पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियां मिलीं, इतिहास और पौराणिक परंपरा के नए आयाम उजागर
दरभंगा में 400–500 वर्ष पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियां मिलीं, इतिहास और पौराणिक परंपरा के नए आयाम उजागर
दरभंगा में 400–500 वर्ष पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियां मिलीं, इतिहास और पौराणिक परंपरा के नए आयाम उजागर
दस्तक 7 मीडिया/ दरभंगा
दरभंगा जिले में प्राचीन पांडुलिपियों की खोज और सत्यापन अभियान के तहत एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। समाहरणालय से मिली जानकारी के अनुसार, जिले में अब तक सत्यापित पांडुलिपियों की संख्या बढ़कर 24 हजार 139 से अधिक हो गई है, जो जिले के समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत की पुष्टि करती है।
जिलाधिकारी कौशल कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पांडुलिपियों की खोज, सत्यापन और संरक्षण अभियान में तेजी लाई जाए। उन्होंने गुणवत्ता सुधार, सख्त निगरानी और जन-जागरूकता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि आम नागरिकों की भागीदारी इस अभियान को और प्रभावी बना सकती है। उन्होंने अपील की कि लोग अपने घरों में सुरक्षित 75 वर्ष से अधिक पुरानी पांडुलिपियों को “ज्ञान भारतम्” पोर्टल पर साझा करें, ताकि उन्हें संरक्षित किया जा सके।
मंगलवार को राघोपुर ड्योढ़ी स्थित हरिनंदन सिंह मेमोरियल ट्रस्ट में जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी चंदन कुमार ने पांडुलिपियों का अवलोकन किया। ट्रस्ट के संचालक रामदत्त सिंह (अधिवक्ता) ने इन पांडुलिपियों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति की जानकारी दी।
अवलोकन के दौरान कई दुर्लभ और प्राचीन ग्रंथ सामने आए, जिनमें लगभग 400 वर्ष पुरानी ‘अचारादर्श’, 500 वर्ष पुरानी ‘काव्य प्रकाशिका’ तथा ‘अमरकोष’ पर टीका सहित ताड़पत्र पर हस्तलिखित पांडुलिपियां शामिल हैं। इन ग्रंथों से दरभंगा के प्राचीन इतिहास और पौराणिक परंपराओं को समझने का एक नया दृष्टिकोण मिलता है।
अधिकारियों ने बताया कि अक्सर घरों में रखे पुराने दस्तावेजों का महत्व लोग नहीं समझ पाते, जबकि वे ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इन पांडुलिपियों के अध्ययन से कई ऐसे तथ्य सामने आ सकते हैं, जो अब तक अपुष्ट रहे हैं।
भारत सरकार और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयास से संचालित “ज्ञान भारतम् मिशन” के तहत 75 वर्ष से अधिक पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियों का डिजिटाइजेशन, संरक्षण और सर्वेक्षण किया जा रहा है। जिलाधिकारी के नेतृत्व में यह अभियान दरभंगा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिससे जिले की ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हो रही है।