करीब ढाई माह बाद दर्ज हुई प्राथमिकी, शिक्षक की मौत पर पुलिस पर उठे सवाल,परिजनों ने लगाया लापरवाही और पैसे लेकर वाहन छोड़ने का आरोप, दो महीना बीत जाने के बाद यातायात डीएसपी के हस्तक्षेप के बाद दर्ज हुई प्राथमिकी।

दस्तक 7मीडिया/संजय कुमार राय 

मधुबनी जिले में अक्सर पुलिसिया कार्यशैली सवालों के घेरे में रहता हे और वरीय पुलिस अधिकारी मूकदर्शक रहते हे ,इस कारण आम जनता की परेशानी बढ़ जाती हे , आम जनता करे भी तो क्या करे ?

मधुबनी जिले में सड़क हादसे में एक सरकारी शिक्षक की मौत के मामले में पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। घटना के करीब दो माह बाद प्राथमिकी दर्ज होने से पीड़ित परिवार में आक्रोश है। परिजनों ने पुलिस पर न केवल लापरवाही, बल्कि पैसे लेकर आरोपी वाहन को छोड़ने का भी आरोप लगाया है। आखिर खजौली थानाध्यक्ष ने करीब दो माह पूर्व हुए दुर्घटना के मामले में प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं की जबकि परिजन कहते हे कि बार बार वे थाना जाकर शिकायत करते रहे लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई ।

जानकारी के अनुसार, बिस्फी थाना क्षेत्र के सिमराही गांव निवासी 25 वर्षीय शिक्षक सोनू कुमार साह 8 फरवरी 2026 को परीक्षा ड्यूटी के लिए राजनगर स्थित एक विद्यालय जा रहे थे। इसी दौरान खजौली थाना क्षेत्र में गुमती के पास एक अज्ञात तेज रफ्तार वाहन ने उन्हें कुचल दिया। हादसे के बाद चालक मौके से फरार हो गया।

घटना की सूचना पर डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची और जांच-पड़ताल की। स्थानीय लोगों के अनुसार, एक संदिग्ध बंगाल नंबर के वाहन को पकड़कर पुलिस के हवाले भी किया गया था। हालांकि, परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने कथित रूप से पैसे लेकर वाहन को छोड़ दिया और मामले को दबाने का प्रयास किया।

गंभीर रूप से घायल शिक्षक को पहले सदर अस्पताल और फिर बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर किया गया, जहां 2 मार्च को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

मृतक के परिजनों का कहना है कि घटना के बाद वे लगातार खजौली थाना का चक्कर लगाते रहे, लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। परिजनों का आरोप है कि थानाध्यक्ष ने उनकी शिकायत को नजरअंदाज किया, जिससे उन्हें सरकारी मुआवजा और न्याय मिलने में देरी हुई। हालांकि परिजन यह भी कहते हे कि जब दुर्घटना ग्रस्त मोटरसाइकिल लेने थाना गए तो थानाध्यक्ष ने बिना पैसा लिए मोटरसाइकिल को छोड़ दिया।

आखिरकार थक-हारकर परिजन ट्रैफिक डीएसपी सुजीत कुमार के पास पहुंचे। डीएसपी के हस्तक्षेप के बाद यातायात थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई और जांच शुरू की गई है।

यातायात थाना प्रभारी नीलमणि रंजन ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है और दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी।

इधर, डीएसपी ने स्पष्ट किया है कि प्राथमिकी दर्ज करने में अनावश्यक देरी के मामले में संबंधित थानाध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी।

बड़ा सवाल यह हे कि घटना स्थल पर पहुंचकर जांच करने के बावजूद तत्काल प्राथमिकी क्यों नहीं दर्ज की गई? अगर समय पर कार्रवाई होती तो क्या पीड़ित परिवार को पहले ही न्याय और मुआवजा मिल सकता था?