दिलावरपुर कोइरी टोला में 15 वर्षों से जलजमाव की समस्या को लेकर आंदोलन की चेतावनी
दिलावरपुर कोइरी टोला में 15 वर्षों से जलजमाव की समस्या को लेकर आंदोलन की चेतावनी
दिलावरपुर कोइरी टोला में 15 वर्षों से जलजमाव की समस्या को लेकर आंदोलन की चेतावनी
दस्तक 7मीडिया/अफज़ल खान
दिलावरपुर अंतर्गत कोइरी टोला, वार्ड संख्या-5 में पिछले डेढ़ दशक (लगभग 15 वर्षों) से गंभीर जलजमाव की समस्या बनी हुई है, जिसका अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो सका है। लगभग 2 किलोमीटर लंबी मुख्य सड़क पर नाले का पानी लगातार जमा रहता है, जिससे हजारों परिवार प्रभावित हैं और आम जनजीवन अत्यंत कष्टमय हो गया है।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए स्थानीय लोगों ने आंदोलन का निर्णय लिया है। आयोजित बैठक में मिथिला स्टूडेंट यूनियन के विश्वविद्यालय संयोजक श्री अमन सक्सेना ने कहा कि एक ओर देश विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है, वहीं दिलावरपुर की जनता आज भी जलजमाव जैसी मूलभूत समस्या से जूझ रही है। उन्होंने कहा कि पिछले 15 वर्षों से क्षेत्र की स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब स्थानीय लोग मंत्री-विधायक श्री मदन सहनी से इस समस्या को लेकर मिलते हैं, तो उन्हें निराशाजनक जवाब मिलता है कि “यहां से वोट नहीं मिला है, इसलिए काम नहीं होगा।” इस तरह की मानसिकता को उन्होंने लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध बताया।
बैठक में उपस्थित स्थानीय नागरिकों—राजू पासवान, शंभू पासवान, अजय महतो, राकेश प्रसाद, प्रकाश पासवान, गीता प्रसाद, शांति देवी, विजय महतो एवं सौरभ कुमार—ने बताया कि स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि इस वार्ड में शादी-विवाह तक प्रभावित हो रहे हैं। क्षेत्र को अब लोग “पानी टोला” के नाम से पुकारने लगे हैं। कई परिवार पलायन कर चुके हैं, जबकि शेष लोग निमोनिया, त्वचा रोग और पैरों में सड़न जैसी बीमारियों से पीड़ित हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सांसद, विधायक, जिला परिषद एवं मुखिया—कोई भी इस समस्या के समाधान के प्रति गंभीर नहीं है। सभी जिम्मेदारी से बचते नजर आ रहे हैं, जिससे आम जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है।
बैठक में निर्णय लिया गया कि स्थानीय लोग शीघ्र ही जिलाधिकारी (DM) एवं प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) को ज्ञापन सौंपेंगे। यदि 10 दिनों के भीतर समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो बहादुरपुर प्रखंड मुख्यालय पर सांकेतिक आंदोलन किया जाएगा। इसके बावजूद भी समाधान नहीं होने की स्थिति में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसमें मुख्य सड़क जाम करने जैसे कदम भी शामिल होंगे।
स्थानीय लोगों ने स्पष्ट किया है कि इस बार वे आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार हैं और समस्या के स्थायी समाधान तक लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रहेगा। साथ ही आगामी पंचायत चुनाव में जनप्रतिनिधियों को जनता के प्रति जवाबदेह बनाया जाएगा।