ज्ञान भारतम् मिशन” के अंतर्गत पांडुलिपियों के सर्वेक्षण, संरक्षण एवं डिजिटलीकरण को लेकर जिला स्तरीय बैठक आयोजित

दस्तक 7मीडिया//दरभंगा 

जिला पदाधिकारी  कौशल कुमार की अध्यक्षता में समाहरणालय स्थित कार्यालय वेश्म में “ज्ञान भारतम् मिशन” के अंतर्गत पांडुलिपियों के सर्वेक्षण, संरक्षण एवं डिजिटलीकरण की कार्य-योजना के संबंध में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

बैठक में मिशन के उद्देश्य, स्वरूप तथा राज्य सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार (पटना) एवं भारत सरकार द्वारा निर्गत दिशा-निर्देशों की विस्तृत जानकारी दी गई।इस अभियान के अंतर्गत 75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी सभी पांडुलिपियों को शामिल किया जाएगा।

जिलाधिकारी ने जिले के सभी नागरिकों, शिक्षाविदों, पुस्तकालयों एवं संस्थानों से अपील की कि वे अपने पास सुरक्षित 75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी पांडुलिपियों की पहचान कर उन्हें “ज्ञान भारतम् मिशन” के अंतर्गत मोबाइल के माध्यम से अपलोड करें। उन्होंने कहा कि नागरिकों की सक्रिय सहभागिता से हमारी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर सुरक्षित रहेगी और आने वाली पीढ़ियों तक संरक्षित रूप में पहुंच सकेगी। उत्कृष्ट कार्य करने वाले नागरिकों को सम्मानित भी किया जाएगा।नागरिक अपने घर, परिवार, पुस्तकालय या संस्थान में उपलब्ध पांडुलिपियों का फोटो लेकर स्कैन कर gyanbharatam.com पोर्टल पर अपलोड कर सकते हैं।

बैठक में मानक संचालन प्रक्रिया (SOP), मोबाइल ऐप प्रशिक्षण, तीन माह की सर्वेक्षण समयसीमा, संभावित संस्थाओं एवं व्यक्तियों की पहचान की रणनीति, डेटा संग्रहण एवं अपलोड प्रक्रिया, जन-जागरूकता अभियान की रूपरेखा तथा पांडुलिपियों के संरक्षण एवं डिजिटलीकरण की व्यवस्था पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से इस राष्ट्रीय अभियान में भाग लेकर भारत की प्राचीन परंपरा को सुरक्षित रखने की अपील की।

जिलाधिकारी ने उप विकास आयुक्त को निर्देश दिया कि सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में पांडुलिपियों की खोज हेतु बैठक आयोजित करें। उन्होंने निर्देशित किया कि पुस्तकालयों, मंदिरों, मदरसों, पुराने विद्यालयों, ऐतिहासिक स्थलों एवं धार्मिक संस्थानों में पांडुलिपियों की खोज सुनिश्चित की जाए तथा संभावित स्थलों का सूचीकरण किया जाए।

साथ ही, कमला नेहरू पुस्तकालय सहित अन्य पुस्तकालयों में पांडुलिपियों की जांच, जिला अभिलेखागार (रिकॉर्ड रूम) का परीक्षण तथा कैथी लिपि सहित अन्य प्राचीन लिपियों में उपलब्ध पांडुलिपियों की पहचान करने का निर्देश दिया गया।

उप विकास आयुक्त  स्वप्निल ने स्थानीय एवं अंचलिक भाषाओं, विशेषकर सुरजामुखी भाषा से संबंधित पांडुलिपियों की खोज पर विशेष बल दिया।जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी श्री चंदन कुमार ने बताया कि जिला स्तरीय समिति का गठन किया जा चुका है तथा प्राप्त पांडुलिपियों को “ज्ञान भारतम्” मोबाइल एप के माध्यम से अपलोड किया जाएगा।

जिलाधिकारी ने कहा कि पांडुलिपियां हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं, जिनका संरक्षण एवं डिजिटलीकरण अत्यंत आवश्यक है।

पांडुलिपि (Manuscript) क्या है?

पांडुलिपि वह प्राचीन हस्तलिखित दस्तावेज है, जो कागज, ताड़पत्र, भोजपत्र या अन्य माध्यमों पर लिखा गया हो तथा जिसमें ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक या वैज्ञानिक महत्व की जानकारी निहित हो (कम से कम 75 वर्ष पुरानी)

मिशन के प्रमुख उद्देश्य:

 प्राचीन पांडुलिपियों की पहचान एवं सर्वेक्षण

  पांडुलिपियों का संरक्षण एवं सुरक्षित भंडारण

  डिजिटल माध्यम से स्थायी रिकॉर्ड (Digitization) तैयार करना

 आमजन एवं संस्थानों की सहभागिता सुनिश्चित करना

डिजिटलीकरण की प्रक्रिया:

 1. पांडुलिपियों की पहचान एवं सूचीकरण

 2. उच्च गुणवत्ता में स्कैनिंग/फोटोग्राफी

 3. विवरण (Metadata) तैयार करना—शीर्षक, भाषा, विषय, लेखक आदि

 4. पोर्टल/मोबाइल ऐप पर अपलोड

 5. सुरक्षित डिजिटल संग्रहण (Digital Archive) तैयार करना /अंत में जिलाधिकारी ने कहा कि यह मिशन भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों, संस्थानों, पुस्तकालयों एवं धार्मिक स्थलों से अपील की है कि वे अपने पास उपलब्ध पांडुलिपियों की जानकारी “ज्ञान भारतम्” ऐप के माध्यम से साझा करें।बैठक में उप विकास आयुक्त श्र स्वप्निल, उप निदेशक जन-सम्पर्क  सत्येन्द्र प्रसाद, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी श्री चंदन कुमार सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।