विश्वविद्यालय संस्कृत विभाग एवं डॉ प्रभात दास फाउंडेशन द्वारा ‘ज्योतिषस्य व्यावहारिकं ज्ञानम्’ विषय पर एकल व्याख्यान आयोजित

दस्तक 7मीडिया/अफज़ल खान 

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग एवं डॉ प्रभात दास फाउंडेशन, दरभंगा के संयुक्त तत्वावधान में “ज्योतिषस्य व्यावहारिकं ज्ञानम्” विषय पर एकल व्याख्यान का आयोजन संस्कृत विभाग में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत झा ने की।

कार्यक्रम का उद्घाटन मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. पूनिता झा द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. कुणाल कुमार झा मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे, जबकि डॉ. आर. एन. चौरसिया ने बीज वक्ता के रूप में अपने विचार रखे। विशिष्ट वक्ता के रूप में दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. शिवानंद झा ने संबोधित किया।

स्वागत भाषण डॉ. ममता स्नेही ने दिया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मोना शर्मा ने किया। कार्यक्रम का संचालन शोधार्थी रितु कुमारी द्वारा किया गया। मंगलाचरण कन्हैया झा, दीप प्रज्वलन मंत्र दीपेश रंजन तथा सरस्वती वंदना कुमकुम कुमारी द्वारा प्रस्तुत की गई।

उद्घाटन संबोधन में प्रो. पूनिता झा ने कहा कि भारतीय प्राच्य विद्याएं वैज्ञानिक दृष्टि से समृद्ध हैं और विश्व स्तर पर सम्मानित हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को संस्कृत एवं ज्योतिष ज्ञान को अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया।

मुख्य वक्ता डॉ. कुणाल कुमार झा ने ज्योतिष को काल गणना का प्राचीन एवं विशाल शास्त्र बताते हुए कहा कि इसका प्रारंभिक ज्ञान सभी के लिए उपयोगी है। उन्होंने बताया कि ज्योतिष वेदांगों में ‘नेत्र’ के समान है और इसमें सूर्य, राशियों एवं नक्षत्रों का विशेष महत्व है।

बीज वक्ता डॉ. आर. एन. चौरसिया ने कहा कि ज्योतिष भारतीय संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण अंग है, जो मानव जीवन को दिशा देने का कार्य करता है। उन्होंने इसे कर्म और भाग्य के संतुलन का विज्ञान बताते हुए कहा कि यह उचित समय पर उचित निर्णय लेने में सहायक होता है।

विशिष्ट वक्ता डॉ. शिवानंद झा ने ज्योतिष को ‘समय का विज्ञान’ बताते हुए कहा कि इसका व्यावहारिक उपयोग जीवन में सफलता दिला सकता है।

अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. कृष्णकांत झा ने कहा कि ज्योतिषशास्त्र हमारी प्राचीन विरासत है, जो भविष्य की संभावनाओं को समझने में सहायक है और जीवन में विवेकपूर्ण निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है।

कार्यक्रम के दौरान अतिथियों का सम्मान पाग, चादर एवं पुष्पगुच्छ से किया गया तथा सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

इस अवसर पर विभिन्न महाविद्यालयों के शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राओं सहित 60 से अधिक लोग उपस्थित थे।