बिरौल उप-डाकघर के ‘डिमोशन’ पर उबाल: क्या जिला बनने की राह में रोड़ा अटका रहा है विभाग?
पूर्व विधायक इजहार अहमद ढ़ांचे के साथ छेड़छाड़ न करें विभाग

दस्तक7 मिडिया, बिरौल, दरभंगा।

एक तरफ जहां बिरौल को जिला बनाने की मांग जन-जन की आवाज बन चुकी है, वहीं डाक विभाग के हालिया फैसले ने जलती आग में घी डालने का काम किया है। विभाग द्वारा बिरौल उप-डाकघर के प्रशासनिक ढांचे में कटौती और पदों को अन्यत्र स्थानांतरित करने के निर्णय से पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश है। स्थानीय नागरिकों का सीधा आरोप है कि विभाग बिरौल के भविष्य को ‘बौना’ बनाने की साजिश कर रहा है।
क्षेत्रीय जनता का कहना है कि जक्सो, जमालपुर और नरकटिया जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में डाक सेवाओं का विस्तार स्वागत योग्य है, लेकिन यह विकास बिरौल की ‘बलि’ देकर नहीं होना चाहिए। अनुभवी कर्मचारियों के पदों में कटौती से बैंकिंग, रजिस्ट्री, और सुकन्या समृद्धि जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं पर सीधा असर पड़ेगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब हम बिरौल को जिला मुख्यालय के रूप में देखने का सपना संजो रहे हैं, तब यहां के संसाधनों को छीनना यह संदेश देता है कि विभाग की नजर में बिरौल की कोई अहमियत नहीं है। यह विकास नहीं, बल्कि बिरौल का ‘डिमोशन’ है। इस मामले में जनप्रतिनिधियों का मौन रहना कहीं राजनीति मुद्दा तो नहीं। पूर्व विधायक डॉ. इजहार अहमद ने इस मुद्दे पर विभाग को घेरते हुए कहा कि बिरौल पोस्ट ऑफिस के ढांचे के साथ छेड़छाड़ करना यहां के हजारों उपभोक्ताओं के हितों पर कुठाराघात है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग को अपने इस ‘तुगलकी फरमान’ पर तुरंत पुनर्विचार करना चाहिए, अन्यथा जनता खामोश नहीं बैठेगी। सैकड़ों उपभोक्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में विभाग को चेतावनी दी है कि यदि निम्नलिखित मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो क्षेत्र में बड़ा जन-आंदोलन खड़ा होगा। यहां बतादें कि बिरौल डाकघर केवल एक सरकारी दफ्तर नहीं, बल्कि इस अनुमंडल की आर्थिक और सामाजिक रीढ़ है। ऐसे में संसाधनों की कटौती न केवल सेवाओं को बाधित करेगी, बल्कि बिरौल के जिला बनने के दावों को भी कमजोर करेगी। अब देखना यह है कि क्या डाक विभाग जनभावनाओं का सम्मान करते हुए अपने कदम पीछे खींचता है या यह विरोध एक निर्णायक संघर्ष का रूप लेता है।