नियमों को ठेंगा दिखाता मौत का सफर: दरभंगा से सुपौल बाजार तक ओवरलोडिंग का खुला खेल
नियमों को ठेंगा दिखाता मौत का सफर: दरभंगा से सुपौल बाजार तक ओवरलोडिंग का खुला खेल
नियमों को ठेंगा दिखाता मौत का सफर: दरभंगा से सुपौल बाजार तक ओवरलोडिंग का खुला खेल
दस्तक7 मिडिया, उत्तम सेनगुप्ता, दरभंगा।
सड़कों पर दौड़ते ‘यमराज’ और सोता हुआ परिवहन विभाग, यह कोई आरोप नहीं, बल्कि दरभंगा से बिरौल की सड़कों पर रोज दिखने वाला खौफनाक मंजर है। ताजा मामला एक ओवरलोड पिकअप वाहन का है, जो दरभंगा से भारी मात्रा में सामग्री लादकर करीब 55 किमी की दूरी तय कर बिरौल के सुपौल बाजार पहुंचा।
आश्चर्य की बात यह है कि रास्ते में कई पुलिस चौकियां और गश्ती दल होने के बावजूद, इस ‘चलता-फिरता पहाड़’ बने वाहन पर किसी की नजर नहीं पड़ी। यह सिर्फ एक पिकअप की कहानी नहीं है। दरभंगा और आसपास के जिलों में चार चक्का से लेकर बारह चक्का वाले मालवाहक वाहनों का भी यही हाल है।
पहला सवाल,क्या 50-52 किमी के लंबे सफर में एक बार भी जांच नहीं हुई?
दूसरा सवाल, क्या विभाग को किसी बड़े हादसे का इंतजार है?
तीसरा सवाल, क्या ओवरलोडिंग के इस खेल को जिम्मेदारों का मौन समर्थन प्राप्त है?
स्थानीय लोगों के अनुसार, वाहन संचालक सरकारी नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से ओवरलोडिंग कर रहे हैं। इन वाहनों की ऊंचाई और चौड़ाई इतनी अधिक होती है कि पीछे से आने वाले वाहनों को रास्ता नहीं दिखता, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। जिले की सड़कों पर सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, लेकिन विभाग कुंभकर्णी नींद में सोया है।
ओवरलोडिंग न केवल सड़क को समय से पहले जर्जर बनाती है, बल्कि यह आम राहगीरों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। दरभंगा से बिरौल के सुपौल बाजार तक का यह बेखौफ सफर बताता है कि चेकपोस्ट और सघन जांच के दावे धरातल पर कितने खोखले हैं। यदि समय रहते परिवहन विभाग और स्थानीय पुलिस ने इन “ओवरलोडेड अजूबों” पर नकेल नहीं कसी, तो वह दिन दूर नहीं जब सड़क पर चलने वाला हर मासूम किसी बड़ी लापरवाही का शिकार होगा। अब देखना यह है कि इस खबर के बाद विभाग की नींद खुलती है या वसूली और लापरवाही का यह खेल इसी तरह जारी रहता है।