नाबालिग से दुष्कर्म मामले में उच्च न्यायालय का आदेश  : आरोपी कथावाचक श्रवण दास  की जमानत अर्जी की खारिज।

दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय 

नाबालिग से दुष्कर्म और बाद में शादी कर छोड़ देने के गंभीर आरोपों से जुड़े मामले में पटना उच्च न्यायालय ने आरोपी श्रवण दास/ श्रवण ठाकुर को जमानत देने से साफ इनकार कर दिया है।

माननीय न्यायमूर्ति संदीप कुमार की एकल पीठ ने आपराधिक विविध (Criminal Miscellaneous) संख्या 19909/2026 पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।

 क्या है मामला

महिला थाना, दरभंगा कांड संख्या 182/2025 के तहत दर्ज इस मामले में आरोपी पर आरोप है कि उसने पीड़िता के नाबालिग रहने के दौरान उसका यौन शोषण किया। बाद में कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए उससे शादी कर ली, लेकिन फिर उसे छोड़ दिया।

मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और POCSO Act की धारा 4 एवं 6 के तहत दर्ज है, जो अत्यंत गंभीर अपराध की श्रेणी में आते हैं।

 कोर्ट में क्या हुई दलील

सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी.एन. शाही ने दलील दी कि उनका मुवक्किल निर्दोष है और उसे झूठा फंसाया गया है।
वहीं राज्य और शिकायतकर्ता की ओर से जमानत का कड़ा विरोध किया गया।

 कोर्ट का सख्त रुख

अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया आरोप बेहद गंभीर हैं ,नाबालिग से दुष्कर्म और फिर दिखावटी शादी कर छोड़ देना ऐसी स्थिति में जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ट्रायल में अनावश्यक देरी होती है, तो आरोपी पुनः जमानत के लिए आवेदन कर सकता है। साथ ही यह भी कहा गया कि इस आदेश में की गई टिप्पणियां केवल जमानत  तक हीं सीमित हे ,इस आदेश से  ट्रायल कोर्ट प्रभावित नहीं होगा।यहां बता दे कि महिला थाना में एक नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी जिसमें कथा वाचक और मौनी बाबा को आरोपित किया गया था ,मौनी बाबा पर नाबालिग को बरगलाने का आरोप हें ,निचली अदालत ने उन्हें शर्त पर जमानत दे चुका हें।कई विद्वान अधिवक्ताओं का कहना हें कि पॉक्सो के मामले में जमानत तो मिल सकता हें लेकिन इस मामले में बहस के बाद दोनों आरोपियों को सजा मिलना तय हें लेकन यह अदालत पर निर्भर हें।