आस्था से थमेगी दुर्घटनाओं की रफ़्तार: बिरौल-गंडौल मुख्य पथ पर स्थापित हुए ‘संकटमोचन’

दस्तक7मिडिया, उत्तम सेनगुप्ता, दरभंगा।

बिरौल-गंडौल राजकीय उच्च पथ एस एच 17 का सोनपुर खंड, जो पिछले कई वर्षों से ‘खूनी सड़क’ के रूप में कुख्यात हो चुका था, अब एक नई आध्यात्मिक उम्मीद का केंद्र बन गया है। इस क्षेत्र में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और लगातार हो रही मौतों को ‘दैवीय प्रकोप’ मानते हुए ग्रामीणों ने सामूहिक आस्था का सहारा लिया है। सोनपुर और फरीदा के बीच स्थित इस खतरनाक मोड़ पर भव्य पंचमुखी हनुमान मंदिर का निर्माण कर प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा की गई है।
स्थानीय जानकारों और बुजुर्गों के अनुसार, जब से इस सड़क का निर्माण हुआ है, तब से लेकर आज तक सोनपुर के इस विशेष खंड पर अनुमानित लगभग तीन दर्जन से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। दर्जनों परिवारों ने अपने चिराग यहां खोए हैं। प्रशासन की तमाम कोशिशों और तकनीकी सुधारों के बावजूद यहां हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा था, जिसे ग्रामीण अब अलौकिक बाधा मान रहे हैं।
सोनपुर और उसके आस पास गांव के ग्रामीणों का दृढ़ विश्वास है कि पंचमुखी हनुमान जी की उपस्थिति से इस क्षेत्र की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होगी। मंदिर की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं। नियमित पूजा-अर्चना, मंदिर में विधि-विधान से पूजा के लिए स्थायी रूप से एक पुजारी की नियुक्ति की गई है।
ग्रामीणों का मानना है कि हनुमान जी का यह स्वरूप ‘संकटमोचन’ है और उनकी स्थापना से भविष्य में होने वाली दुर्घटनाओं पर पूरी तरह अंकुश लगेगा।
इस भव्य मंदिर का निर्माण किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं, बल्कि पूरे गांव के सहयोग और संकल्प से पूर्ण हुआ है।
आज इस मार्ग से गुजरने वाले राहगीर भी मंदिर के पास रुककर माथा टेक रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि राहगीरों की सुरक्षा के लिए बनाया गया एक ‘आध्यात्मिक सुरक्षा कवच’ है। अब यह देखना होगा कि आस्था की यह मशाल इस ‘ब्लैक स्पॉट’ के कलंक को कितना धो पाती है, लेकिन फिलहाल सोनपुर और फरीदा के लोगों के चेहरे पर एक सुरक्षा का भाव और संतोष साफ देखा जा सकता है। क्षेत्र के लोगों ने हनुमान मंदिर के निकट स्पिड ब्रेकर का निर्माण करने की मांग जिला प्रशासन से किया है।