विशेष रिपोर्ट: बिरौल में रसोई गैस की कालाबाजारी का खेल? उपभोक्ताओं को गुमराह कर रहे गैस एजेंसी प्रबंधक
विशेष रिपोर्ट: बिरौल में रसोई गैस की कालाबाजारी का खेल? उपभोक्ताओं को गुमराह कर रहे गैस एजेंसी प्रबंधक
विशेष रिपोर्ट: बिरौल में रसोई गैस की कालाबाजारी का खेल? उपभोक्ताओं को गुमराह कर रहे गैस एजेंसी प्रबंधक
दस्तक7मिडिया, बिरौल, दरभंगा।
बिहार के बिरौल अनुमंडल में रसोई गैस की पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद उपभोक्ताओं को दर-दर भटकने पर मजबूर किया जा रहा है। ताजा मामला ‘जय माता दी इण्डेन गैस एजेंसी’ का है, जहां प्रबंधन की मनमानी और संवेदनहीनता के कारण दर्जनों उपभोक्ताओं को बिना गैस लिए ही ‘बेरंग’ वापस लौटना पड़ रहा है। यह मामला न केवल सेवा में कोताही का है, बल्कि सीधे तौर पर गैस की कालाबाजारी की ओर भी इशारा कर रहा है।
विभिन्न क्षेत्रों से आए शीला देवी,शबनम खातुन, शावा प्रवीण सहित कई उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया है कि जब वे अपनी रिफिल लेने जय माता दी इण्डेन एजेंसी पहुंचे, तो प्रबंधक ने उन्हें यह कहकर भगा दिया कि उनका गैस कनेक्शन ‘पुरुजीत इण्डेन ग्रामीण वितरक केंद्र’ में स्थानांतरित हो गया है।
हैरानी की बात तब हुई जब परेशान उपभोक्ता पुरुजीत इण्डेन केंद्र पहुंचे। वहां के प्रबंधक ने जब ऑनलाइन सिस्टम पर जांच की, तो पता चला कि उन सभी उपभोक्ताओं का नाम अभी भी जय माता दी इण्डेन गैस एजेंसी में ही दर्ज है।
उपभोक्ताओं का सवाल वाजिब है अगर सिस्टम में नाम जय माता दी एजेंसी में है, तो उन्हें दूसरे केंद्र पर क्यों भेजा जा रहा है? स्थानीय लोगों का मानना है कि यह एक सोची-समझी साजिश है। जब उपभोक्ता को कागज पर किसी और एजेंसी का बताकर लौटा दिया जाता है, तो उनके हिस्से की गैस को ऊंचे दामों पर बाहर बेचने की गुंजाइश बन जाती है।
एक ओर सरकार ‘उज्ज्वला’ और अन्य योजनाओं के जरिए घर-घर गैस पहुंचाने का दावा करती है, वहीं जमीनी स्तर पर प्रबंधक उपभोक्ताओं के अधिकारों का गला घोंट रहे हैं।
एक दर्जन से अधिक पीड़ित उपभोक्ताओं ने अब इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। उपभोक्ताओं का कहना है कि जय माता दी इण्डेन गैस एजेंसी के रिकॉर्ड और स्टॉक की गहन जांच हो। प्रबंधक द्वारा उपभोक्ताओं को गलत जानकारी देकर परेशान करने के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।यह स्पष्ट किया जाए कि जब आपूर्ति में कोई किल्लत नहीं है, तो उपभोक्ताओं को ‘नो स्टॉक’ या ‘गलत कनेक्शन’ का बहाना क्यों बनाया जा रहा है ?