ईमानदार जज संजय अग्रवाल को प्रधान जिला जज बनाने की मांग, मुख्य न्यायाधीश को खुला पत्र,

अधिवक्ता कल्याण समिति के युवा प्रकोष्ठ ने कहा“ईमानदारी की सजा मिल रही, मनोबल बढ़ाने के लिए बड़ी जिम्मेदारी दें”

दस्तक 7मीडिया /

अखिल  भारतीय अधिवक्ता कल्याण समिति (युवा प्रकोष्ठ) के राष्ट्रीय महामंत्री सुशील कुमार चौधरी ने पटना उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश को एक खुला पत्र लिखकर ईमानदार एवं कर्तव्यनिष्ठ न्यायिक पदाधिकारी संजय अग्रवाल को बिहार के किसी न्याय मंडल में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (PDJ) के पद पर नियुक्त करने की मांग की है।

पत्र में कहा गया है कि संजय अग्रवाल अपने सेवा काल के दौरान जहां-जहां पदस्थापित रहे, वहां न्यायालय की छवि सुधारने और आम लोगों का भरोसा बढ़ाने में सफल रहे। दरभंगा में पदस्थापन के दौरान उन्होंने न्यायालय को भ्रष्टाचारमुक्त बनाने की दिशा में काम किया, जिसकी सराहना अधिवक्ताओं, कर्मियों और आम लोगों द्वारा की जाती रही।

शिवहर में प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने लंबित मामलों का तेजी से निष्पादन किया और अपने कार्यकाल के अंत तक मात्र 17 से 20 मामले ही लंबित रह गए। इसके बाद किशनगंज में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर रहते हुए उन्होंने न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त प्रणाली लागू करने का प्रयास किया।

हालांकि, पत्र में आरोप लगाया गया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के कारण कुछ लोगों ने साजिश कर उनका तबादला समस्तीपुर करवा दिया। समस्तीपुर में भी उन्होंने लगभग डेढ़ साल के कार्यकाल में करीब 3000 मामलों का निष्पादन किया, जिसमें भरण-पोषण से जुड़े लगभग 250 मामलों में 10 से 15 करोड़ रुपये पीड़ित पक्ष को दिलवाए गए।

पत्र में यह भी कहा गया है कि संजय अग्रवाल की “गलती” सिर्फ इतनी है कि उन्होंने ईमानदारी से न्यायिक कार्य किया और भ्रष्ट पुलिस तंत्र को सुधारने का प्रयास किया। समिति का कहना है कि यदि ऐसे न्यायिक पदाधिकारियों का सम्मान नहीं होगा, तो न्याय व्यवस्था कमजोर हो सकती है।

अंत में समिति ने मुख्य न्यायाधीश से आग्रह किया है कि संजय अग्रवाल को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर नियुक्त कर उनका मनोबल बढ़ाया जाए, ताकि न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता और आम लोगों का विश्वास और मजबूत हो सके।