शिवराम में श्रीमद्भागवत कथा: मृत्यु के सत्य और भक्ति मार्ग का दिया संदेश, श्री श्याम बिहारी जी महाराज ने सुनाया परीक्षित प्रसंग

दस्तक 7मीडिया /दरभंगा 

शिवराम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। कथा के मध्य प्रसिद्ध कथावाचक श्री श्याम बिहारी जी महाराज ने राजा परीक्षित और शुकदेव मुनि का प्रसंग सुनाते हुए जीवन, मृत्यु और भक्ति का गूढ़ संदेश दिया।

कथावाचन के दौरान महाराज ने बताया कि एक बार राजा परीक्षित ने तपस्या में लीन शमिक ऋषि के गले में मृत सर्प डाल दिया। इस घटना से क्रोधित होकर उनके पुत्र श्रृंगी ऋषि ने राजा परीक्षित को श्राप दे दिया कि सात दिनों के भीतर वही सर्प जीवित होकर उन्हें डस लेगा, जिससे उनकी मृत्यु हो जाएगी।

इस श्राप की जानकारी मिलते ही राजा परीक्षित ने संसार के मोह-माया का त्याग कर गंगा तट का रुख किया और वहां महान संत शुकदेव मुनि से जीवन के अंतिम समय में किए जाने वाले कर्तव्यों के बारे में प्रश्न किया। उन्होंने पूछा कि जो मनुष्य मृत्यु के निकट हो, उसे क्या करना चाहिए, किसका स्मरण, जाप, ध्यान और चिंतन करना चाहिए।

इस पर शुकदेव मुनि ने अत्यंत सरल और प्रभावी उत्तर देते हुए कहा कि मनुष्य को अंतिम समय में भगवान श्री हरि की कथा सुननी चाहिए, उनके नाम का स्मरण करना चाहिए और पूरे मन से उनका ध्यान करना चाहिए। यही मोक्ष का सच्चा मार्ग है।