भारत में कुछ विपक्षी दल सत्ता पक्ष का विरोध करते-करते देशहित के विपरीत बयानबाजी करने लगते हैं-आर.के.जायसवाल
भारत में कुछ विपक्षी दल सत्ता पक्ष का विरोध करते-करते देशहित के विपरीत बयानबाजी करने लगते हैं-आर.के.जायसवाल
भारत में कुछ विपक्षी दल सत्ता पक्ष का विरोध करते-करते देशहित के विपरीत बयानबाजी करने लगते हैं-आर.के.जायसवाल
दस्तक7मिडिया, दिल्ली।
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी तनावपूर्ण स्थिति के बावजूद, अमेरिका में विपक्षी नेताओं जैसे कमला हैरिस, हकीम जेफ्रीज और बर्नी सैंडर्स ने सार्वजनिक रूप से सरकार से यह सवाल नहीं किया कि ईरान ने उनके कितने हवाई जहाज गिराए। इसके विपरीत, भारत में ऑपरेशन सिंदूर के बाद विपक्षी नेताओं द्वारा लगातार यह प्रश्न उठाए गए कि पाकिस्तान ने हमारे कितने राफेल विमान गिराए, वे किन कारणों से गिरे और उनकी खरीद कितनी कीमत पर हुई। इन सभी प्रश्नों को लेकर इं.आर.के.जायसवाल(समाजसेवी, सह राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी,राष्ट्रीय मानवाधिकार एक्शन फोरम) ने दस्तक7मिडिया के साथ हुई बातचीत में कहा कि भारत में कुछ विपक्षी दल सत्ता पक्ष का विरोध करते-करते देशहित के विपरीत बयानबाजी करने लगते हैं। इससे सेना का मनोबल प्रभावित होने की आशंका रहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कभी सेना प्रमुख के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की जाती हैं, तो कभी गलवान जैसी घटनाओं को लेकर भ्रामक सूचनाएं फैलाई जाती हैं। साथ ही, दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय एशियाई समिट के दौरान भी विपक्षी व्यवधानों से देश की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास हुआ। उन्होंने कहा कि विपक्ष के ऐसे बयानों का इस्तेमाल पाकिस्तान के मीडिया द्वारा भारत के खिलाफ प्रचार में भी किया जाता है, जो राष्ट्रीय हित के लिए चिंताजनक है।
जायसवाल ने जोर देते हुए कहा कि जब भी देश के सामने कोई संवेदनशील या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय आता है, तब सभी राजनीतिक दलों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे समय में विपक्ष का दायित्व केवल प्रश्न उठाना नहीं, बल्कि देशहित को सर्वोपरि रखते हुए संतुलित और जिम्मेदार व्यवहार करना भी है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका जैसे देशों में संकट या युद्ध की स्थिति में विपक्ष सरकार के साथ खड़ा दिखाई देता है और राष्ट्रीय एकजुटता का संदेश देता है, जिससे सेना का मनोबल और देश की वैश्विक छवि मजबूत होती है। साथ ही कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन यह भूमिका रचनात्मक और मर्यादित होनी चाहिए। सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना आवश्यक है, परंतु यह सब राष्ट्रहित को ध्यान में रखकर होना चाहिए।
अंत में उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि सभी राजनीतिक दल, विशेषकर विपक्ष, राष्ट्रीय मुद्दों पर परिपक्वता और जिम्मेदारी का परिचय दें। देश की सुरक्षा और सम्मान से जुड़े मामलों में एकजुटता ही सबसे बड़ी ताकत होती है।