ईमानदार न्यायिक पदाधिकारी को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश बनाने की मांग, मुख्य न्यायाधीश से की गई अपील,अखिल भारतीय अधिवक्ता कल्याण समिति युवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय महामंत्री सुशील कुमार चौधरी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा: ईमानदारी की सजा नहीं, सम्मान मिलना चाहिए।
ईमानदार न्यायिक पदाधिकारी को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश बनाने की मांग, मुख्य न्यायाधीश से की गई अपील,अखिल भारतीय अधिवक्ता कल्याण समिति युवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय महामंत्री सुशील कुमार चौधरी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा: ईमानदारी की सजा नहीं, सम्मान मिलना चाहिए।
ईमानदार न्यायिक पदाधिकारी को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश बनाने की मांग, मुख्य न्यायाधीश से की गई अपील,अखिल भारतीय अधिवक्ता कल्याण समिति युवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय महामंत्री सुशील कुमार चौधरी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा: ईमानदारी की सजा नहीं, सम्मान मिलना चाहिए।
दस्तक 7मीडिया /विधि संवाददाता
अखिल भारतीय अधिवक्ता कल्याण समिति युवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय महामंत्री सुशील कुमार चौधरी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर पटना उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश से ईमानदार एवं कर्तव्यनिष्ठ न्यायिक पदाधिकारी संजय अग्रवाल को बिहार के किसी न्याय मंडल में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर नियुक्त करने की मांग की है।
श्री चौधरी ने कहा कि यह सर्वविदित है कि संजय अग्रवाल एक ईमानदार, निष्पक्ष और कर्तव्यनिष्ठ न्यायिक पदाधिकारी हैं। वे जहां-जहां भी पदस्थापित रहे, वहां न्यायालय की छवि को सुधारने का उल्लेखनीय प्रयास किया और आम लोगों का न्यायपालिका के प्रति भरोसा मजबूत किया। उन्होंने कहा कि श्री अग्रवाल की विशेषता यह रही है कि वे किसी की पैरवी नहीं सुनते और न ही किसी अधिवक्ता के चेहरे को देखकर न्यायिक आदेश पारित करते हैं, बल्कि पूरी निष्पक्षता और विधि के अनुसार निर्णय देते हैं।
उन्होंने बताया कि जब संजय अग्रवाल दरभंगा में पदस्थापित थे, तब उन्होंने अपने न्यायालय को भ्रष्टाचारमुक्त बनाने का सफल प्रयास किया और नियमों के अनुरूप कार्य करते हुए एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। बाद में जब उनका स्थानांतरण शिवहर में प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय के पद पर हुआ, तब भी उन्होंने ईमानदारी और समर्पण के साथ न्यायिक कार्य करते हुए कई लंबित मामलों का समय पर निष्पादन किया। उनके कार्यकाल के अंत में शिवहर में मात्र 17 से 20 मामले ही लंबित रह गए थे, जो उनके कार्यकुशल और कर्तव्यनिष्ठ होने का प्रमाण है।
श्री चौधरी ने कहा कि शिवहर से उनका स्थानांतरण किशनगंज में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर हुआ, जहां उन्होंने न्यायालय में व्याप्त भ्रष्टाचार को देखते हुए स्पष्ट संकल्प लिया कि किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी संकल्प के साथ उन्होंने किशनगंज में भ्रष्टाचारमुक्त न्यायिक व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि इसी कारण कुछ अधिवक्ताओं और न्यायिक पदाधिकारियों ने मिलकर उन्हें राजनीति का शिकार बनाया और उनका तबादला समस्तीपुर के परिवार न्यायालय में करा दिया। हालांकि इस बदलाव का उनके कार्यशैली पर कोई असर नहीं पड़ा और उन्होंने पूरी ईमानदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन जारी रखा।
प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि समस्तीपुर में अपने लगभग डेढ़ वर्ष के कार्यकाल के दौरान संजय अग्रवाल ने करीब 3000 मामलों का निष्पादन किया, जो अपने आप में एक उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जा रही है। इसके अलावा उन्होंने भरण-पोषण से संबंधित करीब 250 मामलों का निष्पादन करते हुए पीड़ित पक्षों को लगभग 10 से 15 करोड़ रुपये भरण-पोषण के रूप में दिलवाया, जिससे कई परिवारों को राहत मिली।
सुशील कुमार चौधरी ने भावुक शब्दों में कहा कि संजय अग्रवाल की सबसे बड़ी “गलती” सिर्फ इतनी है कि उन्होंने ईमानदारी से न्यायिक दायित्वों का निर्वहन किया और न्यायालय में आम जनता का भरोसा बढ़ाने का प्रयास किया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि एक ईमानदार न्यायिक पदाधिकारी को उसके कार्यों के लिए सम्मान नहीं मिलेगा, तो भविष्य में कोई भी अधिकारी निष्पक्ष होकर न्याय स्थापित करने का साहस नहीं कर पाएगा।
उन्होंने कहा कि समस्तीपुर में आम लोगों के बीच यह चर्चा है कि भ्रष्ट पुलिस तंत्र को सुधारने के उनके प्रयासों के कारण ही उनका स्थानांतरण किया गया। यदि ऐसा है तो यह न्यायिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक स्थिति है और आने वाले समय में इससे न्याय व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है।
श्री चौधरी ने माननीय मुख्य न्यायाधीश से हाथ जोड़कर अपील की कि संजय अग्रवाल जैसे ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ न्यायिक पदाधिकारी को बिहार के किसी न्याय मंडल में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर नियुक्त किया जाए, ताकि ईमानदार अधिकारियों का मनोबल बना रहे और न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास और मजबूत हो सके।
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